नही सुनी मंत्री जी की बात, तो पद से गए प्रधानाचार्य, डीएम से की उच्च स्तरीय जांच की मांग

मंडल स्तरीय अटल आवासीय विद्यालय हर्रैया के प्रधानाचार्य सुशील कुमार त्यागी को विभिन्न आरोपों की जांच के बाद शासन ने पद से हटा दिया है। प्रधानाचार्य ने हटाए जाने के बाद विभागीय कार्य प्रणाली पर सवाल उठाते हुए आयुक्त, जिलाधिकारी और सीडीओ को पत्र लिखकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

सुशील कुमार त्यागी ने आरोप लगाया है कि श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने जिले के भ्रमण के दौरान कक्षा छह में एक बच्चे के नामांकन की इच्छा जताई थी। नामांकन नियमों के विपरीत होने के कारण उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया, जिसके बाद उन पर कार्रवाई की गई।

प्रधानाचार्य ने कहा कि शासनादेश के अनुसार मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा प्रवेश परीक्षा कराई जाती है। परीक्षा में अधिक अंक प्राप्त कर मेरिट सूची में आने वाले छात्रों का ही नामांकन किया जाता है।

उन्होंने बताया कि रवि कुमार पुत्र सूर्य प्रकाश नाम का छात्र कक्षा छह में प्रवेश परीक्षा में कम अंक प्राप्त करने के कारण प्रतीक्षा सूची में 141वें नंबर पर था। छात्र के प्रवेश के लिए विभागीय अधिकारी की ओर से अनुचित दबाव बनाया गया, लेकिन नियमों के विपरीत कार्य करने से इनकार करने पर उन्हें झूठे आरोपों में हटा दिया गया।

प्रधानाचार्य के अनुसार आठ जुलाई को श्रम विभाग के तीन अधिकारी जांच के नाम पर विद्यालय पहुंचे थे। उन्होंने पौधरोपण किया और चाय-नाश्ता करने के बाद वापस चले गए। इसके बाद गलत तथ्यों के आधार पर जांच रिपोर्ट तैयार कर अटल आवासीय विद्यालय समिति लखनऊ को भेजी गई, जिसके आधार पर 13 जुलाई को उनका टर्मिनेशन स्वीकृत कर दिया गया।

सुशील कुमार त्यागी ने उत्तर प्रदेश सरकार से इस मामले की दोबारा उच्च स्तरीय कमेटी से जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जांच के बाद सही तथ्य सामने आ सकेंगे। कार्रवाई के बाद कुछ अभिभावक विद्यालय पहुंचे थे, जिन्हें प्रधानाचार्य ने शांत कराया और कहा कि वह शासन के आदेश का पालन करते हुए जा रहे हैं।

महानिदेशक के आदेश में लगाए गए आरोप

अटल आवासीय विद्यालय उत्तर प्रदेश की महानिदेशक पूजा अग्रवाल के कार्यालय आदेश में कहा गया है कि श्रम एवं सेवायोजन, समन्वय विभाग मंत्री ने प्रधानाचार्य सुशील कुमार त्यागी के खिलाफ स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अभिभावकों की ओर से अभद्र व्यवहार, प्रशासनिक शिथिलता और विद्यालय में अनुशासनहीनता संबंधी शिकायतें मिलने की जानकारी दी थी।

शिकायतों के बाद उप श्रमायुक्त बस्ती की अध्यक्षता में संयुक्त जांच समिति गठित की गई थी। समिति ने विद्यालय पहुंचकर छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, कर्मचारियों, अभिभावकों और अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए और अभिलेखों की जांच की।

जांच में प्रधानाचार्य का कार्य शैक्षणिक मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया। इसके बाद सुशील कुमार त्यागी को कार्यमुक्त करने के आदेश जारी किए गए।

उप श्रमायुक्त ने आरोपों को बताया बेबुनियाद

उप श्रमायुक्त रचना केसरवानी ने कहा कि उन्होंने किसी भी बच्चे के गलत तरीके से नामांकन के लिए दबाव नहीं बनाया था। प्रधानाचार्य के खिलाफ कुछ शिकायतें मिली थीं, जिनकी जांच कराई गई। जांच में पुष्टि होने के बाद रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी, जिसके आधार पर कार्रवाई हुई।

उन्होंने बताया कि सुशील कुमार त्यागी सेवानिवृत्त हैं और उन्हें 11 महीने के अनुबंध पर नियुक्त किया गया था। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से एक बार कमेटी के सामने इस्तीफा भी दिया था, लेकिन बाद में अपनी तैनाती मेरठ में कराने की इच्छा जताई थी।

उप श्रमायुक्त ने कहा कि नवीनीकरण का मामला बोर्ड के सामने रखा गया था। मंत्री और विभागीय अधिकारियों पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं।

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