
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। चुनावी माहौल बनने के साथ ही नेता भी सियासी हवा का रुख भांपने में जुट गए हैं। इसी बीच योगी सरकार के मंत्री और भाजपा सहयोगी निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद के बयानों ने प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है।
हाल ही में संजय निषाद सपा महासचिव शिवपाल सिंह यादव के आवास पर पहुंचे और उनके साथ चाय पर चर्चा की। इसके बाद एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि अगर भाजपा दरवाजा बंद करेगी तो कहीं न कहीं ठिकाना बनाना पड़ेगा। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
भाजपा विधायक ने संजय निषाद के नेतृत्व पर उठाए सवाल
वहीं प्रयागराज की करछना विधानसभा सीट से भाजपा विधायक पीयूष रंजन निषाद ने संजय निषाद को निषाद समाज का सर्वमान्य नेता मानने से इनकार किया है। उनके बयान के बाद सहयोगी दल और भाजपा के बीच रिश्तों को लेकर सियासी चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
2022 चुनाव में निषाद पार्टी को हुआ था नुकसान
2022 विधानसभा चुनाव में भाजपा ने निषाद पार्टी को 16 सीटें दी थीं। इनमें से 11 सीटों पर पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था। वहीं पांच सीटों पर भाजपा ने अपने चुनाव चिह्न पर निषाद पार्टी के उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था।
2027 चुनाव की तैयारी में जुटी निषाद पार्टी
2024 लोकसभा चुनाव में एनडीए के सभी सहयोगी दलों को झटका लगा था। अब 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए निषाद पार्टी संगठन को मजबूत करने में जुट गई है।
पार्टी ने प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से 380 सीटों पर अध्यक्ष और प्रभारी नियुक्त कर दिए हैं। इसके अलावा 160 सीटों के लिए तीन जोनल प्रभारी बनाए गए हैं। वहीं 80 सीटों पर सेक्टर अध्यक्ष और बूथ अध्यक्षों की नियुक्ति की गई है।
भाजपा के साथ रिश्तों पर संजय निषाद ने कही ये बात
संजय निषाद का कहना है कि भाजपा केंद्र और राज्य दोनों जगह सत्ता में है। उन्होंने कहा कि निषाद पार्टी भाजपा के साथ धार्मिक, राजनीतिक और सामाजिक तीनों स्तरों पर जुड़ी हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि अपने समाज के हित और न्याय के लिए भाजपा के साथ रहने का प्रयास किया जा रहा है।









