
भोपाल: इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से हुई मौतों के मामले में जांच रिपोर्ट राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) को सौंप दी गई है। स्वास्थ्य विभाग और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) की जांच समिति की रिपोर्ट में भूमिगत जल में मलमूत्र से जुड़े खतरनाक ई-कोलाई बैक्टीरिया मिलने की पुष्टि हुई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच दूषित जल के कारण भागीरथपुरा में 36 लोगों की मौत हुई थी। जांच में सामने आया कि इलाके की जलापूर्ति लाइन में सीवर का पानी मिलने से संक्रमण फैला।
पानी के नमूनों में मिला ई-कोलाई
जांच समिति ने घटना के करीब तीन महीने बाद अलग-अलग स्रोतों से 43 पानी के नमूने लिए थे। इनमें 10 नमूने नर्मदा पाइपलाइन के थे, जिनमें ई-कोलाई नहीं पाया गया। यही पानी भागीरथपुरा क्षेत्र में सप्लाई किया जाता है।
वहीं, पास की कान्ह नदी के तीन नमूनों में ई-कोलाई की भारी मात्रा मिली। इसके अलावा एक बोरवेल के पानी में भी खतरनाक स्तर पर बैक्टीरिया पाया गया। रिपोर्ट में कहा गया कि इससे संकेत मिलता है कि दूषित पानी भूमिगत जल तक पहुंच चुका है।
समय पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में बताया गया कि स्थानीय लोगों ने पानी के स्वाद और गंध में बदलाव की शिकायत की थी, लेकिन समय रहते नगर निगम अधिकारियों ने जरूरी कदम नहीं उठाए। रिपोर्ट में जलापूर्ति व्यवस्था में लापरवाही को संक्रमण फैलने का मुख्य कारण बताया गया है।
NGT ने मांगी जिम्मेदारी तय करने की जानकारी
बता दे कि रिपोर्ट पर सुनवाई करते हुए NGT की केंद्रीय जोन पीठ के सदस्य न्यायमूर्ति श्यो कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि जलापूर्ति व्यवस्था की लापरवाही की कीमत लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी है। उन्होंने कहा कि जिम्मेदारी तय किए बिना मामले को खत्म नहीं किया जा सकता।
भागीरथपुरा मामले में रशीद नूर खान और कमल कुमार राठी ने अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं। इसके बाद NGT ने विशेषज्ञ समिति गठित कर जांच के निर्देश दिए थे। अब रिपोर्ट संबंधित पक्षों को भेजकर तीन सप्ताह में जवाब मांगा गया है। मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर को होगी।
यूनियन कार्बाइड क्षेत्र के भूजल की भी होगी जांच
भोपाल गैस त्रासदी से जुड़े मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने यूनियन कार्बाइड संयंत्र के आसपास भूजल की वैज्ञानिक जांच कराने के निर्देश दिए हैं।कोर्ट ने मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल को विशेषज्ञ समिति गठित कर मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से पानी के नमूनों की जांच कराने को कहा है। जांच रिपोर्ट 13 अगस्त तक पेश करने के आदेश दिए गए हैं।
हाईकोर्ट ने कहा कि भूजल दूषित होने के आरोपों की वास्तविक स्थिति स्वतंत्र और वैज्ञानिक जांच से ही सामने आएगी। मामले की अगली सुनवाई 3 सितंबर को होगी।









