RML अस्पताल और दिल्ली पुलिस ने खोली पोल- प्रदर्शन के दौरान गोली लगने का दावा झूठा, जानिए क्या है पूरा सच?

नई दिल्ली। 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान घायल हुईं प्रदर्शनकारियों को लेकर सोशल मीडिया पर चल रहे दावों पर डॉ. राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल और दिल्ली पुलिस ने मिलकर विराम लगा दिया है। अस्पताल ने साफ कहा है कि मेडिको-लीगल केस (MLC) की रिपोर्ट को अंतिम चिकित्सकीय निदान नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि यह महज मरीज द्वारा बताई गई बातों का रिकॉर्ड होता है।

RML अस्पताल ने क्या सफाई दी?

अस्पताल ने बुधवार को जारी बयान में बताया कि 20 जुलाई को 32 वर्षीय जिस महिला को लाया गया था, उसने अपने बयान में कान में चोट लगने की बात कही थी। लेकिन जब डॉक्टरों ने क्लिनिकल जांच की, तो उन्हें कान पर एक कटा हुआ घाव मिला, जिसका टांके लगाकर सही तरीके से इलाज किया गया और इसके बाद महिला को स्थिर हालत में छुट्टी दे दी गई। अस्पताल ने यह भी स्पष्ट किया कि MLC का मकसद मरीज की कही हुई बात और मेडिकल जांच के नतीजों को अलग-अलग दर्ज करना है, इसलिए इसे अंतिम निदान समझना गलत होगा।

पुलिस ने भी तोड़ी चुप्पी

दिल्ली पुलिस ने भी बुधवार को आधिकारिक बयान जारी कर उन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि प्रदर्शन के दौरान किसी को गोली लगी है। पुलिस ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “सोशल मीडिया पर जो दावे चल रहे हैं कि 20 जुलाई को सेंट्रल दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी को गोली लगी थी, वे MLC के नतीजों से पुष्ट नहीं होते। MLC में दाहिने ट्रैगस के सामने एक कटा हुआ घाव दर्ज है, जिसमें चोट को कुंद बताया गया है। डॉक्टर की राय के अनुसार, यह एक साधारण चोट है और गोली लगने का कोई सबूत नहीं है।”

पुलिस ने लोगों से की यह अपील

पुलिस ने लोगों से अनुरोध किया है कि वे ऐसे किसी भी दावे को शेयर करने से पहले उसकी सच्चाई जरूर जांच लें और केवल प्रामाणिक स्रोतों से मिली जानकारी पर ही भरोसा करें। वहीं, 22 जुलाई को भर्ती हुईं 21 वर्षीय एक अन्य महिला प्रदर्शनकारी की हालत में लगातार सुधार हो रहा है। अस्पताल के अनुसार, उसकी नली निकाल दी गई है, वह खुद सांस ले रही है, होश में है और डॉक्टरों के निर्देशों पर सही प्रतिक्रिया दे रही है।

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