
नई दिल्ली। भारत अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है और इस बार लाल किले पर आयोजित समारोह में इतिहास में पहली बार एक बड़ा बदलाव देखने को मिला। नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा लिखे गए राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ से पहले राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ बजाया गया। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “आजादी के बाद यह पहली बार है, जब लाल किले पर ‘वंदे मातरम’ बजाया गया है।”
हाल ही में मिला है राष्ट्रगान के बराबर दर्जा
गौरतलब है कि ‘वंदे मातरम’ के पूर्ण संस्करण को हाल ही में राष्ट्रगान के समान कानूनी संरक्षण प्रदान किया गया है। 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के राष्ट्र के नाम संबोधन से पहले और उसके समापन पर भी ‘वंदे मातरम’ बजाया गया था। यह बदलाव इसलिए भी अहम है, क्योंकि अब तक राष्ट्रगान को संवैधानिक दर्जा हासिल है और आधिकारिक प्रोटोकॉल के तहत इसे गणतंत्र का सर्वोच्च संगीतमय प्रतीक माना जाता है, जबकि राष्ट्रीय गीत मुख्य रूप से सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक सीमित था।
नए प्रोटोकॉल के तहत हुआ बदलाव
स्वतंत्रता दिवस समारोह की जिम्मेदारी संभालने वाले रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में घोषणा की थी कि ‘वंदे मातरम’ के 150वें वर्ष को यादगार बनाने के लिए पहली बार इसे विशेष सम्मान दिया जाएगा। नए प्रोटोकॉल के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाल किले पहुंचने पर सबसे पहले राष्ट्रीय गीत बजाया गया, इसके बाद राष्ट्रीय ध्वज फहराने के दौरान राष्ट्रगान बजाया गया।
‘वंदे मातरम’ को लेकर उठती रही हैं बहसें
हालांकि, ‘वंदे मातरम’ को लेकर सियासी और सामाजिक बहसें भी लंबे समय से होती रही हैं। भाजपा और संघ परिवार से जुड़े संगठन लंबे समय से इसकी वकालत करते रहे हैं। वहीं, आलोचकों का तर्क है कि यह संघ परिवार के बड़े हिंदुत्व एजेंडे का हिस्सा हो सकता है, क्योंकि इसके छह पदों में हिंदू देवी-देवताओं—दुर्गा, सरस्वती और लक्ष्मी—के संदर्भ शामिल हैं और भारत को एक पूजनीय मातृ देवी के रूप में पेश किया गया है। आलोचकों का यह भी कहना है कि इसके जरिए भारत की विविधता और बहुलता का जश्न मनाने वाले राष्ट्रगान की जगह ‘वंदे मातरम’ को केंद्र में लाने की कोशिश हो रही है।









