
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने नकली और मिलावटी दवाओं के काले कारोबार को जड़ से खत्म करने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। राजधानी लखनऊ समेत पूरे प्रदेश में दवा लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को अत्यंत पारदर्शी और कठोर बनाया जाएगा। अब किसी भी व्यक्ति को फर्जी तरीके से या किसी ‘डमी व्यक्ति’ के नाम पर लाइसेंस हासिल करने की अनुमति नहीं होगी। नए लाइसेंस जारी करने से पहले स्थल का भौतिक और डिजिटल सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है।
आवासीय क्षेत्रों में बिना मानक पूरे किए दवा लाइसेंस देने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। विशेष रूप से NDPS श्रेणी की दवाओं, कोडीन सिरप और नशीली पेन किलर गोलियों की बिक्री और आपूर्ति पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी।
गड़बड़ी या फर्जी बिलिंग पकड़े जाने पर संदिग्ध दवाओं के निर्माण स्तर (Manufacturer level) तक जांच की जाएगी। इसके तहत संबंधित मेडिकल स्टोर और वितरकों के बैंक ट्रांजेक्शन और डिजिटल रिकॉर्ड्स की भी गहनता से जांच होगी। बिना वैध लाइसेंस के दवा भंडारण करने वालों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार का यह कदम आम जनता तक सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण दवाएं पहुंचाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।









