
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोमवार को फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) लेने और उसे आगे बढ़ाने के कथित मामले में उत्तर प्रदेश और हरियाणा के 9 ठिकानों पर छापेमारी की। ईडी की लखनऊ जोनल ऑफिस की टीम ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और हरियाणा के फरीदाबाद में यह कार्रवाई की।
फर्जी बिल और ई-वे बिल के जरिए बनाया गया ITC नेटवर्क
जांच एजेंसी के मुताबिक, यह मामला एक इंपोर्ट-एक्सपोर्ट कंपनी से जुड़ा है, जिस पर आरोप है कि उसने बिना किसी वास्तविक माल की आवाजाही के फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल तैयार कर करोड़ों रुपये का फर्जी ITC हासिल किया और उसे आगे ट्रांसफर किया।
फर्जी कंपनियों के जरिए पैसों की हेराफेरी का आरोप
ईडी की जांच में सामने आया है कि कथित नेटवर्क में कई फर्जी और गैर-मौजूद कंपनियों का इस्तेमाल किया गया। अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे मामले में सर्कुलर ट्रांजैक्शन, पैसों की कई स्तरों पर हेराफेरी और अलग-अलग संस्थाओं के जरिए नकद निकासी की गई।
19 करोड़ रुपये से ज्यादा के ITC घोटाले की जांच
जीएसटी अधिकारियों की जांच में कथित तौर पर 9.63 करोड़ रुपये के फर्जी ITC का लाभ लेने और 10.28 करोड़ रुपये के ITC को आगे पास करने की जानकारी सामने आई है। एजेंसी का कहना है कि इन गतिविधियों से सरकार के राजस्व को नुकसान पहुंचा और इससे जुड़े पैसों को PMLA के तहत अपराध से अर्जित आय माना गया है।
डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय दस्तावेज खंगाल रही ED
सोमवार की कार्रवाई के दौरान ईडी की टीमें वित्तीय दस्तावेज, डिजिटल सबूत और अन्य रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं। एजेंसी का उद्देश्य कथित अपराध से जुड़े पैसों के स्रोत और पूरे मनी ट्रेल का पता लगाना है।
अन्य आरोपितों और लाभार्थियों की भूमिका की जांच
ईडी अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस कथित ITC फ्रॉड नेटवर्क में कौन-कौन लोग और संस्थाएं शामिल थीं। जांच एजेंसी संभावित लाभार्थियों की पहचान करने और फर्जी लेनदेन से जुड़े दस्तावेज जुटाने में लगी है। मामले में आगे की जांच जारी है।









