
उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर से भारी भूचाल आ गया है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता हरीश रावत ने पार्टी के सभी पदों से अपना इस्तीफा देने की घोषणा कर दी है। यह बड़ा राजनीतिक कदम उनके पूर्व विशेष कार्याधिकारी (OSD) चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की गई छापेमारी और भारी मात्रा में नकदी व सोना बरामद होने के बाद उठाया गया है। इस घटनाक्रम से राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने UKSSSC (उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग) परीक्षा घोटाले से जुड़े मामले में चंदन सिंह जीना के आवास पर छापेमारी की थी। इस कार्रवाई के दौरान उनके घर से 32 लाख रुपये नकद और भारी मात्रा में सोना बरामद किया गया है। चंदन सिंह जीना पर OMR शीट में हेरफेर करने और भर्ती घोटाले में संलिप्त होने के गंभीर आरोप हैं। इस हाई-प्रोफाइल कार्रवाई के बाद राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया, जिसका सीधा असर कांग्रेस पार्टी की छवि पर पड़ता दिख रहा था।
अपने OSD के यहां हुई इस छापेमारी के बाद हरीश रावत ने मीडिया के सामने आकर अपनी स्थिति स्पष्ट की और अपने पद छोड़ने का ऐलान किया। हालांकि, उन्होंने चंदन सिंह जीना को एक विनम्र और सज्जन व्यक्ति बताया, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि उनकी वजह से पार्टी किसी भी तरह से कमजोर या असहज स्थिति में नहीं आनी चाहिए। हरीश रावत ने कहा कि नैतिकता के आधार पर वह कांग्रेस पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे रहे हैं ताकि पार्टी निष्पक्षता के साथ आगे बढ़ सके।
इस इस्तीफे के बाद कांग्रेस पार्टी के भीतर और राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। UKSSSC परीक्षा घोटाला राज्य के सबसे बड़े घोटालों में से एक रहा है, और अब पूर्व सीएम के करीबी के घर हुई इस कार्रवाई ने मामले को और गर्मा दिया है। आने वाले दिनों में इस सियासी घटनाक्रम का उत्तराखंड की राजनीति पर गहरा असर देखने को मिल सकता है, क्योंकि जांच एजेंसियां इस मामले में और भी कई बड़े खुलासे कर सकती हैं।









