
लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर से सुगबुगाहट तेज हो गई है, जिसकी मुख्य वजह निषाद पार्टी के प्रमुख और कैबिनेट मंत्री संजय निषाद का एक बयान है। हाल ही में सपा के वरिष्ठ नेता माता प्रसाद पांडे से मुलाकात के बाद संजय निषाद ने खुलकर बयान दिया है कि अगर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उनके लिए दरवाजा बंद किया, तो वे आगे की राजनीतिक स्थिति पर गंभीरता से विचार करेंगे। उन्होंने यह भी साफ किया कि जब समाजवादी पार्टी (SP) ने उनके लिए दरवाजे बंद किए थे, तब वे मजबूरी में बीजेपी के पाले में गए थे।
''BJP ने दरवाजा बंद किया तो विचार करेंगे। सपा ने दरवाजा बंद किया तो BJP में गया था। बीजेपी ने ऐसा किया तो आगे विचार करेंगे। आरक्षण के लिए आवाज उठाने की बात हो रही है। सपा-बीजेपी विधायकों से बात हो रही है। आरक्षण न मिलने से BJP को नुकसान हुआ। कल मैं प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल… pic.twitter.com/ZPTOceI3EM
— भारत समाचार | Bharat Samachar (@bstvlive) September 15, 2026
संजय निषाद ने अपनी पार्टी के मुख्य एजेंडे यानी आरक्षण के मुद्दे पर जोर देते हुए कहा कि जो भी पार्टी निषाद समाज के आरक्षण के लिए आवाज उठाएगी, वे उसी के साथ खड़े होंगे। उन्होंने दावा किया कि आरक्षण न मिलने की वजह से ही चुनाव में बीजेपी को नुकसान उठाना पड़ा है। इसके साथ ही उन्होंने खुलासा किया कि उनकी पार्टी के संपर्क में सपा और बीजेपी दोनों दलों के कई विधायक हैं और लगातार बातचीत चल रही है। अपनी सक्रियता को बढ़ाते हुए उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में वह प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह से भी मिले थे।
निशांत पार्टी प्रमुख के इन तेवरों से राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा शुरू हो गई है कि क्या राज्य में एनडीए गठबंधन के भीतर कुछ ठीक नहीं चल रहा है। आगामी चुनावों और राजनीतिक समीकरणों को साधने के लिए संजय निषाद का यह बयान काफी अहम माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि बीजेपी आलाकमान इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है और राज्य की राजनीति में इसका क्या असर पड़ता है।









