
अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक बेहद अहम खोज सामने आई है। वैज्ञानिकों ने पहली बार हमारे सौरमंडल के बाहर मौजूद एक ग्रह से आने वाले रेडियो उत्सर्जन को सीधे उसी ग्रह पर ट्रेस करने का दावा किया है। करीब 63 प्रकाश वर्ष दूर मौजूद इस ग्रह का नाम बीटा पिक्टोरिस बी (Beta Pictoris b) है। दक्षिण अफ्रीका के MeerKAT रेडियो टेलीस्कोप से मिले इस सिग्नल से वैज्ञानिकों को ग्रह के शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र और वहां संभावित ऑरोरा के बारे में नई जानकारी मिली है।
किस ग्रह से आ रहा है रेडियो सिग्नल?
बीटा पिक्टोरिस बी एक विशाल गैस दानव है, जो बीटा पिक्टोरिस नाम के युवा तारे की परिक्रमा करता है। यह ग्रह पृथ्वी से लगभग 63 प्रकाश वर्ष दूर है और इसका द्रव्यमान बृहस्पति से करीब 11 गुना है। पहले भी वैज्ञानिक इस ग्रह के रेडियो उत्सर्जन की तलाश कर चुके हैं, लेकिन 2023 में किए गए एक रेडियो अध्ययन में सिग्नल नहीं मिला था।
नई स्टडी में हार्वर्ड एंड स्मिथसोनियन सेंटर फॉर एस्ट्रोफिजिक्स और यूनिवर्सिटी ऑफ ओरेगन से जुड़े वैज्ञानिकों ने दक्षिण अफ्रीका के MeerKAT रेडियो टेलीस्कोप ऐरे की मदद से तेज और बार-बार आने वाले रेडियो बर्स्ट रिकॉर्ड किए। शोधकर्ताओं के अनुसार, इन रेडियो संकेतों की लोकेशन बीटा पिक्टोरिस बी से मेल खाती है और उसके होस्ट स्टार से अलग की जा सकती है।
क्या यह एलियन का संदेश है?
नहीं। उपलब्ध शोध में इन रेडियो संकेतों को किसी एलियन संदेश के तौर पर नहीं बताया गया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, इनके पीछे प्राकृतिक चुंबकीय गतिविधि और ऑरोरा प्रमुख वजह हो सकती है।
पृथ्वी पर ऑरोरा तब दिखाई देते हैं जब आवेशित कण ग्रह के चुंबकीय क्षेत्र और वायुमंडल के साथ संपर्क करते हैं। बीटा पिक्टोरिस बी पर भी इसी तरह की प्रक्रिया रेडियो उत्सर्जन पैदा कर सकती है। शोधकर्ताओं ने इसे electron cyclotron maser radiation से जोड़ा है, जो शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र वाले पिंडों से रेडियो तरंगें पैदा कर सकता है।
ग्रह का चुंबकीय क्षेत्र कितना मजबूत है?
इस खोज की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रेडियो संकेतों से वैज्ञानिकों को एक्सोप्लैनेट के चुंबकीय क्षेत्र का प्रत्यक्ष अनुमान लगाने का मौका मिला है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, बीटा पिक्टोरिस बी पर चुंबकीय क्षेत्र की ताकत कम से कम 1.25 किलो-गॉस हो सकती है। यह पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र की तुलना में हजारों गुना अधिक मजबूत है।
ग्रह की तेज घूर्णन गति भी इस घटना में भूमिका निभा सकती है। बीटा पिक्टोरिस बी लगभग 8 से 9 घंटे में अपनी धुरी पर एक चक्कर पूरा करता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, तेज घूर्णन और शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र मिलकर वहां रेडियो उत्सर्जन की प्रक्रिया को संचालित कर सकते हैं।
क्यों ऐतिहासिक मानी जा रही है यह खोज?
अंतरिक्ष में रेडियो सिग्नल का पता लगाना कोई नई बात नहीं है। चुनौती यह रही है कि यह साबित किया जाए कि सिग्नल वास्तव में ग्रह से आ रहा है या उसके आसपास मौजूद तारे से।
नई स्टडी में वैज्ञानिकों का दावा है कि MeerKAT के जरिए रेडियो स्रोत को सीधे बीटा पिक्टोरिस बी की स्थिति से जोड़ा गया है। शोधकर्ताओं के विश्लेषण में यह स्रोत होस्ट स्टार और सिस्टम के दूसरे ग्रह से अलग दिखाई देता है। यही वजह है कि इसे एक्सोप्लैनेट से सीधे रेडियो उत्सर्जन का पहला स्पष्ट पता लगाने वाला अध्ययन बताया जा रहा है।
जीवन की तलाश में क्यों महत्वपूर्ण है चुंबकीय क्षेत्र?
ग्रह का चुंबकीय क्षेत्र उसके आसपास के अंतरिक्ष वातावरण को समझने में अहम भूमिका निभाता है। चुंबकीय क्षेत्र ग्रह और उसके वायुमंडल के साथ तारकीय हवाओं तथा ऊर्जावान कणों की बातचीत को प्रभावित करता है।
हालांकि, बीटा पिक्टोरिस बी गैस दानव है और इसे पृथ्वी जैसे संभावित रहने योग्य ग्रह के रूप में नहीं देखा जा रहा है। लेकिन इस ग्रह के चुंबकीय क्षेत्र को सीधे समझने की तकनीक भविष्य में दूसरे एक्सोप्लैनेट्स का अध्ययन करने में उपयोगी हो सकती है। वैज्ञानिकों ने अब अन्य विशाल एक्सोप्लैनेट्स से इसी तरह के रेडियो उत्सर्जन की तलाश शुरू करने की दिशा में रुचि दिखाई है।









