
डेस्क : लो ब्लड प्रेशर को अक्सर कमजोरी या सामान्य परेशानी से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन कुछ स्थितियों में अचानक बीपी गिरना गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। खासतौर पर जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक बैठने या लेटने के बाद खड़ा होता है और कुछ ही मिनटों के भीतर उसे चक्कर, कमजोरी या आंखों के सामने धुंधलापन महसूस होने लगे, तो इसे पोश्चरल हाइपोटेंशन कहा जा सकता है।
पोश्चरल हाइपोटेंशन में शरीर की स्थिति बदलने के बाद ब्लड प्रेशर तेजी से कम हो जाता है। खड़े होने पर ग्रेविटी के कारण रक्त का कुछ हिस्सा पैरों की ओर चला जाता है। ऐसी स्थिति में अगर शरीर रक्त संचार को पर्याप्त तेजी से सामान्य नहीं कर पाता, तो दिमाग तक रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। आमतौर पर यह परेशानी खड़े होने के कुछ मिनटों के भीतर महसूस हो सकती है।
इसके लक्षणों में चक्कर आना, सिर भारी लगना, भ्रम की स्थिति, गिर जाना, मितली, धुंधला दिखाई देना, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी, हाथ-पैर ठंडे पड़ना, पसीना आना, तेज सांस चलना और अत्यधिक थकान शामिल हो सकते हैं। उम्रदराज लोगों में अचानक चक्कर आने और गिरने की वजह से चोट लगने का जोखिम भी बढ़ सकता है।
लो ब्लड प्रेशर के पीछे कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं। इनमें हृदय से जुड़ी समस्याएं, शरीर में रक्त की मात्रा कम होना, गंभीर संक्रमण, हार्मोन संबंधी गड़बड़ी और गंभीर एलर्जिक रिएक्शन जैसी स्थितियां शामिल हो सकती हैं। इसलिए बार-बार बीपी कम होने या इसके साथ चक्कर और बेहोशी जैसे लक्षण आने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
पोश्चरल हाइपोटेंशन की समस्या से बचने के लिए रोजमर्रा की कुछ आदतों में बदलाव मददगार हो सकते हैं। सोते समय सिर को थोड़ा ऊंचा रखना, लेटने से बैठने और फिर खड़े होने तक धीरे-धीरे पोजिशन बदलना और उठते समय बेड या किसी मजबूत सहारे का इस्तेमाल करना उपयोगी हो सकता है। पैरों में ब्लड सर्कुलेशन बनाए रखने के लिए हल्की एक्सरसाइज और स्ट्रेचिंग भी की जा सकती है।
इसके अलावा, बिस्तर से उठते ही अचानक नीचे झुकने से बचना चाहिए। अगर कोई चीज नीचे पड़ी है तो उसे उठाने के लिए अचानक झुकने के बजाय किसी लंबे हैंडल वाले साधन का इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर चक्कर, बेहोशी या लो ब्लड प्रेशर की समस्या बार-बार हो रही है, तो इसके कारण का पता लगाने के लिए डॉक्टर से जांच और सलाह लेना जरूरी है।
डिस्क्लेमर: आर्टिकल में दी गई सलाह और सुझाव सिर्फ़ आम गाइडेंस के लिए हैं और इन्हें प्रोफेशनल मेडिकल सलाह नहीं मानना चाहिए। अगर आपके कोई सवाल या चिंताएं हैं, तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।









