सुबह सिर्फ 10 मिनट करें ओम का जाप, तनाव से नींद तक मिल सकते हैं ये फायदे

भागदौड़ भरी आधुनिक जिंदगी में तनाव, चिंता और काम का दबाव आम समस्या बन चुके हैं। ऐसे में लोग मानसिक शांति और बेहतर स्वास्थ्य के लिए ...

नई दिल्ली: भागदौड़ भरी आधुनिक जिंदगी में तनाव, चिंता और काम का दबाव आम समस्या बन चुके हैं। ऐसे में लोग मानसिक शांति और बेहतर स्वास्थ्य के लिए योग, मेडिटेशन और एक्सरसाइज का सहारा लेते हैं। भारतीय परंपरा में ‘ॐ’ का जाप लंबे समय से ध्यान और साधना का हिस्सा रहा है। कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में भी ओम जप और ध्यान से जुड़े अभ्यासों के दौरान तनाव, चिंता और शरीर की विश्राम प्रतिक्रिया पर संभावित सकारात्मक प्रभाव देखे गए हैं।

सुबह का समय ध्यान और साधना के लिए उपयुक्त माना जाता है। यदि आप रोज कुछ मिनट शांत वातावरण में बैठकर नियंत्रित तरीके से ओम का उच्चारण करते हैं, तो यह एक तरह के माइंडफुलनेस और धीमी सांस लेने वाले अभ्यास की तरह काम कर सकता है। आइए जानते हैं इसके संभावित फायदे।

तनाव और चिंता कम करने में मददगार

ओम का जाप करते समय व्यक्ति अपना ध्यान आवाज, सांस और उसके कंपन पर केंद्रित करता है। इससे मन को शांत करने और तनाव कम करने में मदद मिल सकती है। कुछ शोधों में ओम जप के दौरान मस्तिष्क और स्वायत्त तंत्रिका तंत्र में बदलाव देखे गए हैं।

हालांकि, इसे तनाव या एंग्जायटी का स्थायी इलाज नहीं माना जा सकता। गंभीर या लगातार चिंता की स्थिति में विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।

दिल और सांसों के लिए फायदेमंद हो सकता है

ओम का उच्चारण सामान्य तौर पर गहरी सांस लेने और धीरे-धीरे सांस छोड़ने के साथ किया जाता है। इस तरह यह धीमी और नियंत्रित श्वास का अभ्यास बन जाता है। ऐसे ब्रीदिंग एक्सरसाइज शरीर की रिलैक्सेशन प्रतिक्रिया को बढ़ावा दे सकते हैं।

ओम के ‘म’ उच्चारण के दौरान कंपन महसूस होता है, लेकिन इसे सीधे तौर पर वेगस नर्व को सक्रिय करने और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने का निश्चित वैज्ञानिक प्रमाण मानना सही नहीं होगा। इसके प्रभावों को लेकर अभी और शोध की जरूरत है।

सांस लेने की क्षमता और रिलैक्सेशन

ओम का जाप करते समय लंबी सांस लेकर धीरे-धीरे उसे बाहर छोड़ा जाता है। इससे सांसों की गति धीमी हो सकती है और व्यक्ति को रिलैक्स महसूस हो सकता है। नियमित रूप से किए जाने वाले धीमे श्वसन अभ्यास मानसिक तनाव को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं।

हालांकि, ओम जाप को फेफड़ों की बीमारी का इलाज या शरीर से ‘जहरीली गैसों’ को निकालने का तरीका नहीं माना जाना चाहिए।

एकाग्रता बढ़ाने में मिल सकती है मदद

ध्यान के साथ ओम का जाप करने में व्यक्ति को लगातार एक ही ध्वनि और सांस पर ध्यान केंद्रित करना पड़ता है। इससे माइंडफुलनेस और एकाग्रता के अभ्यास में मदद मिल सकती है।

विद्यार्थियों और लंबे समय तक स्क्रीन या काम पर ध्यान देने वाले लोगों के लिए यह कुछ समय के लिए मानसिक ब्रेक की तरह काम कर सकता है। हालांकि, याददाश्त या निर्णय लेने की क्षमता में जबरदस्त बढ़ोतरी का दावा करने के लिए पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं।

नींद के लिए भी किया जा सकता है अभ्यास

तनाव और लगातार चलने वाले विचार कई लोगों की नींद को प्रभावित कर सकते हैं। सोने से पहले या दिन की शुरुआत में ध्यान और धीमी सांसों के साथ ओम का जाप मन को रिलैक्स करने में मदद कर सकता है।

कुछ लोगों को इससे नींद की गुणवत्ता बेहतर महसूस हो सकती है, लेकिन अनिद्रा को हमेशा के लिए खत्म करने का दावा वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं है। लंबे समय से नींद की समस्या होने पर डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

कैसे करें ओम का जाप?

शांत जगह पर आराम से बैठें। आंखें बंद करके धीरे-धीरे सांस लें और फिर सांस छोड़ते हुए आराम से ‘ॐ’ का उच्चारण करें। शुरुआत में 5 से 10 मिनट का अभ्यास किया जा सकता है। किसी तरह की परेशानी, चक्कर या सांस लेने में दिक्कत महसूस हो तो अभ्यास रोक दें।

ओम का जाप ध्यान और विश्राम की एक पारंपरिक पद्धति के रूप में किया जा सकता है, लेकिन इसे किसी बीमारी के इलाज या डॉक्टर की सलाह के विकल्प के तौर पर नहीं लेना चाहिए।

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