
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ट्रैफिक पुलिस की लापरवाही और अव्यवस्थित कार्यप्रणाली के कारण आम जनता को हर दिन भीषण जाम की समस्या से जूझना पड़ रहा है। रविवार का दिन होने के बावजूद राजधानी का हृदय स्थल कहे जाने वाले हजरतगंज, सचिवालय, लोकभवन और विधानसभा क्षेत्र गाड़ियों के भारी हुजूम और रेंगते ट्रैफिक की चपेट में दिखा। मुख्य सड़कों पर पुलिस द्वारा किए गए जबरन और अनियोजित डायवर्जन के कारण लखनऊ की सड़कें आम चालकों के लिए किसी ‘भूलभुलैया’ से कम साबित नहीं हो रही हैं।
बता दें, स्थानीय निवासियों और वाहन चालकों का आरोप है कि लखनऊ ट्रैफिक पुलिस की पूरी मुस्तैदी और ध्यान केवल वीआईपी मूवमेंट को हरी झंडी दिखाने तक ही सीमित रह गया है। वीआईपी वाहनों की आवाजाही के लिए मुख्य मार्गों को जगह-जगह से अचानक ब्लॉक कर दिया जाता है, जिससे पीछे कई किलोमीटर लंबा जाम लग जाता है। स्थिति यह हो गई है कि अब छुट्टी के दिन भी सरकार के प्रशासनिक और राजनीतिक केंद्र माने जाने वाले क्षेत्रों में घंटों गाड़ियां फंसी रहती हैं।
शहर के अव्यवस्थित ट्रैफिक मैनेजमेंट को लेकर जनता में गहरा असंतोष है। लोगों का कहना है कि एक दौर वह था जब लखनऊ में ट्रैफिक व्यवस्था में जरा सी चूक पर कमिश्नर स्तर के अधिकारियों पर गाज गिर जाती थी, लेकिन आज स्थिति इतनी बदतर होने के बावजूद जिम्मेदार पुलिस कर्मियों और कॉन्स्टेबलों पर भी कोई कार्रवाई नहीं होती है। बिना पूर्व सूचना के लगाए जा रहे डायवर्जन और पुलिस की लचर कार्यशैली पर अब उठते सवाल लखनऊ पुलिस की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं।









