
पटना: बिहार की सियासत में एक बार फिर तब भूचाल आ गया जब मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह को जनता दल यूनाइटेड (JDU) से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया। पार्टी का आरोप है कि विधान परिषद चुनाव के दौरान उन्होंने पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ जाकर जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार का खुला समर्थन और प्रचार किया था। जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष द्वारा विधानसभा अध्यक्ष को सौंपे गए सबूतों और वीडियो के आधार पर अब विधानसभा सचिवालय की तरफ से अनंत सिंह को नोटिस जारी कर 7 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है, जिसे विधायक ने प्राप्त भी कर लिया है।
इस हाई-प्रोफाइल मामले के सामने आने के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है कि क्या अनंत सिंह की विधायकी खतरे में है और अब उनके पास कानूनी व राजनीतिक रूप से क्या विकल्प बचे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, पार्टी से निष्कासित किए जाने का मतलब यह कतई नहीं है कि विधायक की सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाएगी। सदस्यता जाने या रहने का फैसला संविधान की दसवीं अनुसूची यानी दल-बदल विरोधी कानून के तहत विधानसभा अध्यक्ष को करना होता है। सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों में यह स्पष्ट रहा है कि पार्टी से निकाले जाने के बावजूद दल-बदल कानून के तहत उन्हें उसी दल का सदस्य माना जाता है जिसके टिकट पर वे चुनकर आए थे।
ऐसी स्थिति में अनंत सिंह के पास सबसे पहला विकल्प यह है कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर विधानसभा सचिव को लिखित जवाब सौंपें और अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज करें। वे वीडियो और पेपर कटिंग जैसे साक्ष्यों की प्रामाणिकता पर सवाल उठा सकते हैं या यह दलील दे सकते हैं कि उनपर लगाए गए आरोप राजनीतिक पूर्वाग्रह से प्रेरित हैं। इसके अलावा, दूसरा विकल्प यह है कि वे व्यक्तिगत रूप से या अपने वकीलों के माध्यम से विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष पेश होकर अपना पक्ष रखें और सफाई दें। यदि इन कदमों से बात नहीं बनती है और सदस्यता पर संकट गहराता है, तो वे न्याय के लिए उच्च न्यायालय (High Court) का दरवाजा भी खटखटा सकते हैं।
जानकारों का मानना है कि यदि अनंत सिंह का जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो विधानसभा अध्यक्ष दल-बदल कानून के तहत उनकी सदस्यता रद्द करने जैसा कड़ा कदम उठा सकते हैं। हालांकि, इस संकट से उबरने का एक रास्ता यह भी है कि वे पार्टी नेतृत्व से समन्वय बिठाकर माफी मांग लें या राजनीतिक समझौते के जरिए इस पूरे प्रकरण को शांत कराएं। बहरहाल, आने वाले कुछ दिन मोकामा के विधायक के राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करने में बेहद अहम साबित होने वाले हैं।









