जमानत को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, एक ही FIR से उत्पन्न जमानत याचिकाओं को अलग-अलग पीठों के समक्ष नहीं किया जाना चाहिए सूचीबद्ध

जमानत को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक ही प्राथमिकी (FIR) से उत्पन्न होने वाली जमानत याचिकाओं को अलग-अलग पीठों के समक्ष सूचीबद्ध नहीं किया जाना चाहिए।

जमानत को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक ही प्राथमिकी (FIR) से उत्पन्न होने वाली जमानत याचिकाओं को अलग-अलग पीठों के समक्ष सूचीबद्ध नहीं किया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति बी.आर. गवई और संजय करोल एक ऐसे मामले में सुनवाई कर रहे थे जहां अपीलकर्ता जमानत के लिए ख़ारिज होने से व्यथित है।

इस मामले में एक ही उच्च न्यायालय के विभिन्न एकल न्यायाधीशों द्वारा विभिन्न अभियुक्तों द्वारा दायर विभिन्न आवेदनों पर विचार किया गया है। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि कई उच्च न्यायालयों में यह प्रथा अपनाई जाती है कि एक ही प्राथमिकी से उत्पन्न होने वाले आवेदनों को एक न्यायाधीश के समक्ष रखा जाना चाहिए। हालाँकि, ऐसा प्रतीत होता है कि उड़ीसा उच्च न्यायालय में यह प्रथा नहीं है।

पीठ को एक ही प्राथमिकी से संबंधित विभिन्न अभियुक्तों के आवेदनों में कम से कम तीन अलग-अलग न्यायाधीशों द्वारा पारित आदेशों का पता चला है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस तरह की प्रथा से विषम स्थिति पैदा होती है। कुछ अभियुक्तों को जमानत दे दी जाती है जबकि समान भूमिका वाले एक ही अपराध के कुछ अभियुक्तों को जमानत देने से इनकार कर दिया जाता है।

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