
डिजिटल डेस्क- देश में इस वक्त पहाड़ी इलाकों से लेकर मैदान इलाके में मानसूनी बारिश हो रही है. झमाझम बरस रही बारिश ने मौसम के मिजाज को ही बदल दिया है. लेकिन मौसम के बदलते मिजाज के बाद से
ऐसा क्यों होता है कि पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की स्थिति बढ़ जाती है. बीते कुछ सालों में मानसून के दस्तक देते ही पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की स्थिति काफी ज्यादा बढ़ती ही जा रही है.
भूस्खलन के साथ पहाड़ी इलाकों में स्थानीय लोगों के साथ-साथ पयर्टकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है. उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में लैंडस्लाइड की घटना हुई है.इसके अलावा हिमाचल में भी कई जगहों पर भूस्खलन हुआ.
भारी बारिश की वजह से ऐसी हालत हो गई है कि मौसम विभाग की ओर से उत्तराखंड में 30 जून तक का रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है. बीते समय में भूस्खलन की वजह से जान-माल का भी नुकसान हुआ है.
भूस्खलन की बढ़ती घटनाओं पर एक्सपर्ट का मानना है कि पहाड़ी इलाके में सड़कों को चौड़ा करने के लिए पहाड़ों को ऊपर से काटा जा रहा है. इसी वजह से भूस्खलन की स्थिति ज्यादा हो जाती है. लगातार पहाड़ों की कटाई की वजह से पहाड़ी इलाके में खतरा बढ़ता ही जा रहा है. पहाड़ बुनियादी रुप से कमजोर होने लगे है. बारिश के मौसम में पहाड़ों की नींव कमजोर हो जाती है. इसलिए वो ज्यादा टूटकर गिरने लगते है.









