सुप्रीम कोर्ट ने ठुकराई ट्रांसपोर्ट ड्राइवर की अपील, कहा- सशस्त्र बलों में घोर अनुशासनहीनता अस्वीकार्य, पढ़ें पूरा मामला

न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति राजेश बिंदल की खंडपीठ ने उनकी अपील को खारिज करते हुए कहा: “अपीलकर्ता, जो सशस्त्र बलों का सदस्य था, की ओर से इस तरह की घोर अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है."

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सेना सेवा में नामांकित एक मैकेनिकल ट्रांसपोर्ट ड्राइवर द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया, जिसे दी गई छुट्टी से अधिक समय तक रुकने के कारण सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था. शीर्ष अदालत ने उसे आदतन अपराधी पाते हुए कहा कि सशस्त्र बलों के एक सदस्य द्वारा इस तरह की घोर अनुशासनहीनता अस्वीकार्य है.

शीर्ष अदालत ने इस संबंध में कहा, “अनुशासन सशस्त्र बलों की अंतर्निहित पहचान और सेवा की एक गैर-परक्राम्य शर्त है.” सशस्त्र बल न्यायाधिकरण ने उन्हें दी गई छुट्टी की समाप्ति पर ड्यूटी पर वापस लौटने में विफल रहने के कारण सेवा से उनकी बर्खास्तगी को बरकरार रखा था. जिसे लेकर उन्होंने शीर्ष अदालत का रुख किया. मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति राजेश बिंदल की खंडपीठ ने की.

न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति राजेश बिंदल की खंडपीठ ने उनकी अपील को खारिज करते हुए कहा: “अपीलकर्ता, जो सशस्त्र बलों का सदस्य था, की ओर से इस तरह की घोर अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है. वह इस बार 108 दिनों की लंबी अवधि के लिए छुट्टी की अनुपस्थिति के लिए माफी मांगने के लिए लाइन से बाहर रहे, जिसे अगर स्वीकार कर लिया जाता, तो सेवा में अन्य लोगों के लिए गलत संकेत जाता.”

शीर्ष अदालत की दो जजों वाली खंडपीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा, “इस तथ्य को ध्यान में रखना चाहिए कि अनुशासन सशस्त्र बलों की अंतर्निहित पहचान है और सेवा की एक गैर-परक्राम्य शर्त है.”

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