कस्टोडियल डेथ पर SC सख्त, UP DGP से मांगा हलफनामा, जानें कोर्ट का आदेश…

सुनवाई के दौरान, न्यायमूर्ति भट ने कहा, " हम यहां जांच करने के लिए नहीं आए हैं. हम यहां व्यवस्था को दुरुस्त होते देखना चाहते हैं." यूपी के महाधिवक्ता ने पीठ को सूचित किया कि राज्य ने एक हलफनामा दायर किया है जिसमें व्याख्या की गई है और अतीक गिरोह की हत्याओं के संबंध में राज्य द्वारा गठित आयोगों द्वारा जांच जारी है.

सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस मुठभेड़ों के संबंध में जारी पिछले दिशानिर्देशों के अनुपालन की सीमा पर उत्तर प्रदेश राज्य से प्रतिक्रिया मांगी. पीठ ने कहा कि उसे एक वरिष्ठ डीजीपी स्तर रैंक के अधिकारी से हलफनामा चाहिए. इसमें हिरासत में हत्याओं के मुद्दे से निपटने के लिए और दिशानिर्देश तैयार करने पर भी विचार किया गया.

जस्टिस एस रवींद्र भट और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ 2 याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी. एक वकील विशाल तिवारी द्वारा गैंगस्टर-राजनेता अतीक अहमद और उनके भाई की हत्याओं की पृष्ठभूमि में दायर किया गया था. तिवारी ने 2017 के बाद से यूपी में हुई 183 पुलिस मुठभेड़ों की पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज से स्वतंत्र जांच कराने की मांग की.

वहीं दूसरी याचिका अतीक अहमद की बहन आयशा नूरी ने अप्रैल 2023 में अपने भाइयों की हत्याओं की अदालत की निगरानी में जांच के लिए दायर की थी. जिसमें अतीक व उसके भाई को पुलिस अभिरक्षा में मेडिकल जांच के लिए ले जाया जा रहा था.

सुनवाई के दौरान, न्यायमूर्ति भट ने कहा, ” हम यहां जांच करने के लिए नहीं आए हैं. हम यहां व्यवस्था को दुरुस्त होते देखना चाहते हैं.” यूपी के महाधिवक्ता ने पीठ को सूचित किया कि राज्य ने एक हलफनामा दायर किया है जिसमें व्याख्या की गई है और अतीक गिरोह की हत्याओं के संबंध में राज्य द्वारा गठित आयोगों द्वारा जांच जारी है.

न्यायमूर्ति भट ने कहा, “आयोग चलते रहेंगे. यदि आप जांच और मुकदमा चलाना चाहते हैं, तो आयोग रास्ते में नहीं आएगा.” उन्होंने आरोपियों के बारे में जानकारी, जांच के चरण और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के दिशानिर्देशों के पालन के बारे में जानकारी मांगते हुए और अधिक ठोस कार्रवाई के लिए दबाव डाला.

‘हिरासत में ऐसी हत्याओं के पीछे एक व्यापक सांठगांठ है’

न्यायमूर्ति भट ने जेलों के भीतर अपराधों की व्यापकता और ऐसी घटनाओं के पीछे व्यापक सांठगांठ पर सवाल उठाए. उन्होंने टिप्पणी की, ”केवल इन हाई-प्रोफाइल मामलों में ही नहीं, जेलों में भी अपराध होते हैं. यह चिंताजनक बात है-कोई सांठगांठ है. हम जानना चाहते हैं कि सांठगांठ तोड़ने में किसकी दिलचस्पी है?”

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