चुनाव से पहले समाजवादियों का पार्टी से पलायन! अब सलीम शेरवानी ने दिया इस्तीफा, सपा को एक और झटका

अपने इस्तीफा पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि अब अपने राजनीतिक भविष्य के बारे में वह अगले कुछ हफ्तों में निर्णय लेंगे।

डिजिटल डेस्क: देश में लोकसभा चुनाव को लेकर अब कुछ ही दिन बाकी है। मगर इस बीच समाजवादी पार्टी के हाल कुछ ठीक नजर नहीं आ रहे। एक के बाद एक सपा के साइकिल से उनके नेताओं का उतरना आगामी चुनावों में पार्टी के लिए एक भारी मुसीबत बनकर खड़ा है। हाल ही में स्वामी प्रसाद मौर्य और अब सपा के दिग्गज नेता सलीम शेरवानी का पार्टी से दूर होना इस बात का साफ़ सबूत है। जी हाँ, रविवार यानी 18 फरवरी को सपा के सलीम ने पार्टी के महासचिव पद से इस्तीफा देते हुए सियासी खेमे में हलचल तेज कर दी है। अपने इस्तीफा पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि अब अपने राजनीतिक भविष्य के बारे में वह अगले कुछ हफ्तों में निर्णय लेंगे।

मुसलमान सच्चे रहनुमा की तलाश में

आपको बता दें कि, सलीम शेरवानी ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव पद से इस्तीफा देने के साथ ही एक पत्र जारी किया है। अपने पत्र में उन्होंने सपा प्रमुख अखिलेश यादव को सवालों के कठघरे में लाकर खड़ा कर दिया है। एक के बाद एक उन्होंने उनसे कई सवाल पूछे हैं। उन्होंने कहा कि “जिस तरह से राज्यसभा के चुनाव में मुसलमानों को अनदेखा किया गया वो यह दर्शाता है कि समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी अलग कैसे हैं? उन्होंने पत्र में लिखा कि पार्टी के इस रवैये से प्रदेश का मुसलमान उपेक्षित महसूस कर रहा है। मुसलमान एक सच्चे रहनुमा की तलाश में हैं। इन्हीं सब मुद्दों से परेशान होकर मै महासचिव पद से इस्तीफा दे रहा हूं। जल्द ही भविष्य को लेकर फैसला लूंगा।”

विपक्षी गठबंधन बेमानी यह साबित हुआ

अपने पत्र में उन्होंने कहा कि, “लोकसभा चुनाव के लिए मजबूत विपक्षी गठबंधन बनाने का प्रयास बेमानी साबित हो रहा है। किसी भी दल का बड़ा नेता या कोई भी दल इस मुद्दे के प्रति गंभीर नहीं नजर आ रहा है। जिस हिसाब से पार्टी ने मुसलमानों की अनदेखी की है, उससे लगता है कि अखिलेश यादव अल्पसंख्यकों के प्रति जिम्मेदार नहीं है। वो खुद PDA को कोई महत्व नहीं देते हैं। इसलिए मुझे पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव पद से इस्तीफा देना पड़ रहा है।

कौन हैं सलीम शेरवानी

सलीम बदायूं लोकसभा सीट से 5 बार सांसद रह चुके हैं। उन्होंने चार बार सपा के टिकट पर चुनाव जीता, जबकि अपने पहली सांसदी का जिम्मा उन्हें कांग्रेस के टिकट पर मिला था। सलीम को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का करीबी भी माना जाता है। मिली खबर के अनुसार राजीव गांधी के ही कहने पर उन्होंने वर्ष 1984 में पहला चुनाव लड़ा था। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले सलीम शेरवानी ने एक बार फिर सपा का साथ छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए थे। कांग्रेस के ही टिकट पर सलीम ने बदायूं से चुनाव में हिस्सा लिया। जिसमें वह तीसरे स्थान पर आया। इसके बाद एक बार फिर सपा में वापस आकर पार्टी के  महासचिव पद का कार्यभार संभाला। 

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