
भोपाल। अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया पारदर्शिता और निष्पक्षता के सवालों में घिर गई है। ताजा खुलासों के मुताबिक, भर्ती के लिए आए 150 आवेदनों में से केवल 25 को योग्य पाया गया था, जिनमें से 13 ‘चहेतों’ को नियुक्ति दे दी गई। सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि मामला हाईकोर्ट में लंबित होने के बावजूद विवि की कार्यपरिषद ने इन शिक्षकों की परिवीक्षा अवधि समाप्त कर उन्हें स्थाई कर दिया है।
रसूख और रिश्तों की लंबी सूची
नियुक्तियों पर उठ रहे सवालों के बीच कई ऐसे नाम सामने आए हैं जिनके संबंध सीधे तौर पर विवि प्रबंधन या प्रभावशाली संगठनों से हैं:
- पारिवारिक नियुक्तियां: डॉ. चित्रलेखा कढेल (अशोक कढेल, शिक्षा उत्थान न्यास प्रमुख की पत्नी), डॉ. रश्मि चतुर्वेदी (धीरेंद्र चतुर्वेदी, प्रज्ञा प्रवाह संयोजक की पत्नी), और डॉ. नीलम सिंह (सेवा भारती से जुड़े डॉ. शैलेंद्र सिंह की पत्नी) के नाम प्रमुख हैं।
- कुलपति से करीबी: भूगोल विभाग के डॉ. झामलाल रशिया और अर्थशास्त्र विभाग के डॉ. आशीष नवकासे को कुलपति खेम सिंह का करीबी रिश्तेदार बताया जा रहा है।
- संगठनों से जुड़ाव: डॉ. विजय मिश्रा (ABVP के पूर्व प्रांत अध्यक्ष), डॉ. जितेंद्र भावसार (विज्ञान भारती सदस्य), और डॉ. अमित सोनी जैसे नामों पर भी सिफारिशी नियुक्ति के आरोप हैं।
- नियमों की अनदेखी: कंप्यूटर विभाग के डॉ. भरत बाथम पर आरोप है कि उन्होंने नॉन-टीचिंग पद पर रहते हुए बिना अनुमति के पीएचडी पूरी की।
हाईकोर्ट में चुनौती: निरस्त हो सकती हैं नियुक्तियां
भर्ती प्रक्रिया में ‘रोस्टर’ का पालन न करने को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। एडवोकेट विकास जैन का कहना है कि यदि कोर्ट रोस्टर के उल्लंघन की पुष्टि करता है, तो ये सभी नियुक्तियां स्वतः ही निरस्त हो जाएंगी।
वहीं, विवि के कुलगुरु देवआनंद हिंडोलिया ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि ये नियुक्तियां उनके कार्यकाल से पहले की हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिवीक्षा अवधि को हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन सशर्त समाप्त किया गया है।
पारदर्शिता पर खड़े हुए सवाल
शिक्षा जगत में इस खुलासे के बाद हड़कंप मचा हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उच्च शिक्षण संस्थानों में योग्यता के बजाय सिफारिश और रिश्तों को प्राथमिकता दी जाएगी, तो शिक्षा की गुणवत्ता का गिरना तय है। अब सबकी निगाहें हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, जो इन 13 प्रोफेसरों के भविष्य का फैसला करेगा।









