
लंदन: मशहूर लंदन साइंस म्यूज़ियम में एनर्जी ट्रांज़िशन कमीशन (ETC) के सहयोग से आयोजित पहले ‘अडानी ग्रीन एनर्जी इलेक्ट्रिफिकेशन डायलॉग’ में अडानी ग्रुप के नेतृत्व ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और भारत के फ्यूचर-प्रूफ एनर्जी रोडमैप को लेकर एक बेहद महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। वैश्विक मंच पर बोलते हुए कंपनी के प्रतिनिधि (सागर अडानी) ने कहा कि जियोपॉलिटिकल (भू-राजनीतिक) झटकों और बढ़ती आर्थिक अनिश्चितताओं के इस दौर में किसी भी देश के लिए ऊर्जा सुरक्षा, सामर्थ्य (अफोर्डेबिलिटी) और सस्टेनेबिलिटी का ‘ग्लोबल ट्राइफेक्टा’ सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है। इस वैश्विक संकट का एकमात्र और सटीक समाधान पूरी अर्थव्यवस्था का ‘इलेक्ट्रिफिकेशन’ (विद्युतीकरण) करना है।
इस संवाद कार्यक्रम में भारत की बढ़ती ऊर्जा मांगों का विशेष रूप से उल्लेख किया गया। वर्तमान में भारत का वार्षिक ऊर्जा उपभोग लगभग 10,000 टेरावॉट-घंटे है, जो कि समान आबादी वाले चीन (32,810 टेरावॉट-घंटे) की तुलना में एक-तिहाई से भी कम है। मिडिल क्लास की बढ़ती आबादी और जीवन स्तर में सुधार के कारण आगामी दो दशकों में भारत को लगभग 2,000 गीगावॉट (GW) नई बिजली क्षमता जोड़ने की एक अभूतपूर्व ‘स्ट्रक्चरल छलांग’ लगानी होगी। भारत को विदेशी और आयातित तेल-गैस पर अपनी निर्भरता को खत्म कर पूरी तरह से घरेलू संसाधनों पर आधारित एक ‘ऊर्जा बैकबोन’ तैयार करनी होगी, जिसमें रिन्यूएबल्स, हाइड्रो, एफिशिएंट थर्मल और न्यूक्लियर पावर का एक प्रैक्टिकल मिश्रण शामिल होगा।
इस महा-अभियान में अडानी ग्रुप देश के सबसे बड़े प्राइवेट सेक्टर ऑपरेटर के रूप में रीढ़ की हड्डी की भूमिका निभा रहा है। ग्रुप ने बिजली वैल्यू चेन के हर हिस्से में अपनी उपस्थिति मजबूत की है:
रिन्यूएबल एनर्जी: कंपनी दुनिया के सबसे बड़े रिन्यूएबल पोर्टफोलियो का निर्माण कर रही है, जिसका लक्ष्य 2030 तक 50 GW क्षमता हासिल करना है।
न्यूक्लियर पावर: बेसलोड बिजली की आवश्यकता को पूरा करने के लिए 2035 तक 10 GW का एक विशाल न्यूक्लियर पोर्टफोलियो तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टोरेज: चौबीसों घंटे क्लीन पावर की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए पंप्ड हाइड्रो, यूटिलिटी-स्केल बैटरी स्टोरेज, ग्रीन हाइड्रोजन इकोसिस्टम और राष्ट्रव्यापी ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार में बड़े पैमाने पर निवेश किया जा रहा है।
इस दूरदर्शी विज़न को हकीकत में बदलने के लिए अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹8.3 लाख करोड़ रुपये) से अधिक के निवेश का ऐतिहासिक कमिटमेंट किया है, जो दुनिया के सबसे बड़े प्राइवेट सेक्टर ग्रीन कमिटमेंट्स में से एक है। वक्ताओं ने इस पूरी यात्रा में पिछले एक दशक में भारत सरकार द्वारा लालफीताशाही को कम करने, पुराने और जटिल नियमों को हटाने तथा निजी निवेश को बढ़ावा देने वाले नीतिगत सुधारों (मैक्रो और माइक्रो पॉलिसी बदलावों) की भी जमकर सराहना की, जिसने उद्योगों को वैश्विक स्तर पर विस्तार करने का एक मजबूत माहौल दिया है।









