
अयोध्या : राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण और रामधन गबन विवाद के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी का बयान चर्चा में है। एक मीडिया चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि मंदिर में आने वाले चढ़ावे की निगरानी की जिम्मेदारी ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा के पास थी। उनके इस बयान के बाद अब सवाल उठने लगे हैं कि चढ़ावे और उससे जुड़े प्रबंधन की जिम्मेदारी किस स्तर पर तय की जाएगी।
चढ़ावे की निगरानी अनिल मिश्रा के जिम्मे थी
गोविंद देव गिरी ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष हैं, इसलिए उनके बयान को अहम माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि चढ़ावे की निगरानी अनिल मिश्रा के जिम्मे थी। वहीं, इससे पहले ट्रस्ट की बैठक से एक रात पहले जारी अपने भावुक बयान में उन्होंने कहा था कि उन्हें बैंक खाते की जानकारी नहीं है, उनके हस्ताक्षर अधिकृत नहीं हैं और वे बैंक संचालन से जुड़े फैसलों में शामिल नहीं हैं।
बयान के बाद सवाल खड़े हो रहे
अब उनके ताजा बयान के बाद सवाल खड़े हो रहे हैं कि अगर वे ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष हैं और कोष की जिम्मेदारी उनके पद से जुड़ी है, तो क्या मंदिर में आने वाला चढ़ावा भी कोष का हिस्सा नहीं माना जाएगा? आखिर चढ़ावे की निगरानी, गणना और प्रबंधन की जिम्मेदारी किसकी थी, इसे लेकर चर्चा तेज हो गई है।
राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण की जांच और सामने आ रही रिपोर्टों के बीच ट्रस्ट के अंदर जिम्मेदारियों को लेकर उठ रहे सवालों ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। हालांकि, ट्रस्ट की ओर से इस मामले में अंतिम स्थिति स्पष्ट किए जाने का इंतजार है।









