राम मंदिर चढ़ावा कांड का दिखने लगा असर,चढ़ावे में आई 80 फीसदी की कमी,भक्तों की संख्या भी घटी

अयोध्या: अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान और चढ़ावे की राशि में कथित गबन व वित्तीय गड़बड़ी के मामले का अब श्रद्धालुओं की आस्था और मंदिर की आय पर सीधा व बेहद गंभीर असर देखने को मिल रहा है। मंदिर ट्रस्ट के भीतर सामने आई विसंगतियों और एसआईटी (SIT) जांच के बीच, देश-दुनिया से आने वाले राम भक्तों के मन को गहरा आघात पहुंचा है। मंदिर प्रबंधन और अंदरूनी सूत्रों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में अप्रत्याशित कमी दर्ज की गई है, जिसका सीधा असर राम लला के दरबार में आने वाले गुप्त और काउंटर चढ़ावे पर पड़ा है।

वित्तीय आंकड़ों पर नजर डालें तो गिरावट का यह ग्राफ बेहद चौंकाने वाला है। राम मंदिर से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पिछले कई महीनों से मंदिर में प्रति माह औसतन 7 करोड़ रुपये के आसपास का चढ़ावा (दान) आ रहा था। लेकिन जब से दान पेटी से पैसे चोरी होने, सुरक्षा और भोग-प्रसाद के नाम पर करोड़ों रुपये की हेराफेरी के आरोप सुर्खियों में आए हैं, तब से भक्तों ने दान देने में भारी संकोच दिखाना शुरू कर दिया है। पिछले महज 15 दिनों के भीतर यह चढ़ावा राशि घटकर मात्र डेढ़ (1.5) करोड़ रुपये रह गई है, जो कि सीधे तौर पर लगभग 80% की भारी गिरावट को दर्शाती है।

विपक्ष और आम आदमी पार्टी (AAP) समेत कई राजनीतिक दलों द्वारा ट्रस्ट को भंग करने और चंपत राय व अनिल मिश्रा जैसे पदाधिकारियों की गिरफ्तारी की मांग के बीच आम श्रद्धालुओं में पारदर्शिता को लेकर अविश्वास की भावना पैदा हो गई है। कई भक्तों का कहना है कि वे प्रभु श्री राम के दर्शन तो पूरी श्रद्धा के साथ कर रहे हैं, लेकिन जब तक दान के एक-एक रुपये का हिसाब पारदर्शी नहीं हो जाता, तब तक वे दान पेटियों और काउंटरों पर अपनी गाढ़ी कमाई का पैसा चढ़ाने से बचेंगे। चढ़ावे और भक्तों की संख्या में आई यह ऐतिहासिक गिरावट मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधन और व्यवस्थापकों के लिए एक बहुत बड़ी चिंता का विषय बन गई है।

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