
अयोध्या: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में हुए रामधन गबन और चढ़ावा चोरी मामले में विशेष जांच टीम (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट से एक ऐसा रोंगटे खड़े कर देने वाला खुलासा हुआ है, जिसने पूरे देश के श्रद्धालुओं को झकझोर कर रख दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, रामधन की असली और सबसे बड़ी लूट साल 2025 में आयोजित प्रयागराज महाकुंभ के दौरान हुई थी। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस महालूट को अंजाम देने के लिए मंदिर के काउंटिंग रूम (दानपात्र की गिनती वाले कमरे) की सुरक्षा व्यवस्था को जानबूझकर बेहद ढीला कर दिया गया था। शातिरों ने इस कदर खेल रचा कि अब उस पूरी अवधि की CCTV फुटेज भी गायब है, जिससे चोरी की सटीक मात्रा का केवल अंदाजा ही लगाया जा सकता है।
ब्रेकिंग। रामधन की असली लूट तो महाकुम्भ के दौरान हुई। अब CCTV फुटेज भी नहीं। सब गायब। सिर्फ अंदाजा लग सकता है। शातिरों ने सबूत ही मिटा दिए। महाकुंभ के दौरान ढीली हुई राम मंदिर की सुरक्षा, काउंटिंग रूम में फ्रिस्किंग ‘अनिवार्य’ से ‘रैंडम’ हुई। चंपत की सहमति से अनिल मिश्रा ने नियम… pic.twitter.com/WOXLQ1dt4t
— भारत समाचार | Bharat Samachar (@bstvlive) July 8, 2026
चंपत राय और अनिल मिश्रा की सहमति से बदली SOP?
एसआईटी की रिपोर्ट में इशारा किया गया है कि यह पूरा खेल एक सोची-समझी रणनीति के तहत हुआ। पहले काउंटिंग रूम में आने-जाने वाले हर एक कर्मचारी और बैंक अधिकारी की ‘अनिवार्य’ (Mandatory) तलाशी और फ्रिस्किंग का कड़ा नियम था। लेकिन, 6 फरवरी 2025 को एक संशोधित एसओपी (SOP – Standard Operating Procedure) जारी की गई। आरोप है कि चंपत राय की सहमति से अनिल मिश्रा ने इन नियमों को बदल दिया और एक नया MoU (समझौता ज्ञापन) साइन हुआ। इस नए नियम के तहत कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल को हटाकर जांच को केवल ‘रैंडम’ (कभी-कभार होने वाली जांच) में तब्दील कर दिया गया।
बैंक खातों और बयानों ने खोली पोल:
एसआईटी (SIT) ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा है कि बैंक अधिकारियों के दर्ज बयानों और मुख्य आरोपियों के निजी बैंक खातों में जमा की गई बेहिसाब रकम के ट्रांजैक्शन से यह साफ संकेत मिलते हैं कि चोरी और गबन की यह खौफनाक घटनाएं अप्रैल महीने से बहुत पहले (यानी महाकुंभ के दौरान ही) शुरू हो चुकी थीं। सुरक्षा प्रोटोकॉल को जानबूझकर कमजोर करके शातिरों को खुली छूट दी गई। चूंकि उस कालखंड का डिजिटल डेटा और सीसीटीवी बैकअप गायब कर दिया गया है, इसलिए पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों की फोरेंसिक ऑडिट और रिमांड के दौरान मिलने वाले बयानों के आधार पर ही गबन के कुल आंकड़ों का आकलन करने में जुटी है।









