
अयोध्या: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में रामभक्तों की आस्था के प्रतीक ‘रामधन’ की लूट का मामला अब बेहद संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल मोड़ पर पहुंच गया है। विशेष जांच टीम (SIT) की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट से जो नया और सबसे बड़ा खुलासा हुआ है, उसने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के भीतर बैठे सफेदपोशों को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। एसआईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरे चढ़ावा चोरी कांड के पीछे किसी पेशेवर संगठित गिरोह के सरगना की तरह शातिर चालें चली जा रही थीं, और इस खेल के पर्दे के पीछे के असली खिलाड़ी कोई और नहीं बल्कि ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी अनिल मिश्रा (Trustee Anil Mishra) हैं।
ब्रेकिंग न्यूज़: मास्टरमाइंड मिश्रा। संगठित गिरोह के सरगना जैसी शातिर चाल। ट्रस्टी अनिल मिश्रा का रामधन गबन में पर्दे के पीछे से खेल। लेकिन SIT ने करतूत पकड़ी।
— भारत समाचार | Bharat Samachar (@bstvlive) July 8, 2026
अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट से बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में श्रीराम… pic.twitter.com/8rme19aBG2
जांच एजेंसी ने अनिल मिश्रा को इस महाघोटाले के मुख्य घेरे में खड़ा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, दान की गिनती वाले अति-सुरक्षित काउंटिंग रूम (Counting Room) में सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ने की पूरी जानकारी अनिल मिश्रा को पहले से थी, लेकिन उन्होंने जानबूझकर आंखें मूंदे रखीं ताकि रामधन की चोरी को सुगम बनाया जा सके।
6 फरवरी की कड़क SOP को कागजों तक सीमित रखा
एसआईटी रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि 6 फरवरी 2025 को दान प्रबंधन के लिए एक बेहद विस्तृत और कड़क एसओपी (SOP) बनाई गई थी। इस नियम के तहत काउंटिंग रूम में आने-जाने वाले हर व्यक्ति की त्रिस्तरीय फ्रिस्किंग (कड़ी तलाशी), बायोमेट्रिक अटेंडेंस, बिना जेब वाली (पॉकेटलेस) यूनिफॉर्म, निजी सामान ले जाने पर पूर्ण रोक, लाइव सीसीटीवी मॉनिटरिंग और डेली रिपोर्टिंग अनिवार्य की गई थी।
चूंकि अनिल मिश्रा ट्रस्ट की ओर से वित्तीय प्रबंधन और दान गिनती की निगरानी के सीधे तौर पर जिम्मेदार थे, इसलिए इस एसओपी को लागू कराना उनका मुख्य दायित्व था। इसके बावजूद, सबसे अहम नियम ‘अनिवार्य फ्रिस्किंग’ को कभी जमीन पर उतरने ही नहीं दिया गया। एसआईटी ने इसे एक सोची-समझी ‘गंभीर ऑपरेशनल चूक’ माना है।
6 संदिग्ध काउंटिंग कर्मी और एफआईआर:
इस महालूट मामले में अब तक कई लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज की जा चुकी है और 6 काउंटिंग कर्मियों को सीधे तौर पर इस वित्तीय धोखाधड़ी का संदिग्ध माना गया है। सीसीटीवी कैमरों के सामने जिस तरह बेखौफ होकर नोटों के बंडल गायब किए गए, वह इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि निचले स्तर के कर्मचारियों को ऊपर बैठे जिम्मेदार लोगों का पूरा अभयदान प्राप्त था। एसआईटी द्वारा अनिल मिश्रा की भूमिका को इस तरह रेखांकित किए जाने के बाद अब अयोध्या से लेकर लखनऊ और दिल्ली तक हड़कंप मच गया है, और आने वाले दिनों में ट्रस्ट के भीतर बहुत बड़ी वैधानिक और दंडात्मक कार्रवाई तय मानी जा रही है।









