राम मंदिर चढ़ावा कांड में SIT का एक्शन,ट्रस्ट पदाधिकारियों के अयोध्या से बाहर जाने पर रोक,2021 तक के रिकॉर्ड खंगाले

अयोध्या : अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के चढ़ावे और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े एक कथित बड़े मामले में विशेष जांच टीम (SIT) ने अब तक की सबसे बड़ी और सख्त कार्रवाई की है। एसआईटी ने अपनी 6 दिनों की गहन पड़ताल के बाद एक प्रारंभिक रिपोर्ट (Preliminary Report) तैयार कर ली है। इसी के साथ जांच टीम ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राम मंदिर ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों और संदेह के घेरे में आए कर्मचारियों के जिला (अयोध्या) छोड़कर बाहर जाने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। उन्हें सख्त हिदायत दी गई है कि वे बिना अनुमति के अयोध्या से बाहर नहीं जा सकते।

दानपात्रों की रकम, खर्चों और जमीन खरीद की हो रही जांच
एसआईटी की इस हाई-लेवल जांच के दायरे में मंदिर की वित्तीय व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं। जांच टीम मुख्य रूप से निम्नलिखित मामलों की परतें खंगाल रही है:

दानपात्रों की धनराशि का उपयोग: श्रद्धालुओं द्वारा दानपात्रों में चढ़ाए गए करोड़ों रुपये के चढ़ावे का सही इस्तेमाल हुआ या नहीं।

अनावश्यक खर्चे: ट्रस्ट के नाम पर दिखाए गए भारी-भरकम और अनावश्यक खर्चों की वास्तविकता।

भूमि खरीद के मामले: मंदिर परिसर और उसके आसपास ट्रस्ट द्वारा की गई जमीनों की खरीद-फरोख्त से जुड़े विवादित सौदे।

बैंक अधिकारी रडार पर; 2021 तक के पुराने रिकॉर्ड खंगाले
इस कथित वित्तीय गड़बड़ी की तह तक जाने के लिए एसआईटी ने अपनी जांच का दायरा काफी पीछे तक बढ़ा दिया है। टीम ने साल 2021 तक के सभी पुराने वित्तीय और प्रशासनिक रिकॉर्ड को अपने कब्जे में लेकर उनकी स्क्रूटनी (बारीक जांच) शुरू कर दी है। इसके अलावा, जिन बैंकों में ट्रस्ट के खाते संचालित हैं, उन संबंधित बैंक अधिकारियों को भी रडार पर लिया गया है। एसआईटी ने बैंक अधिकारियों से लंबी पूछताछ कर पैसों के ट्रांसफर और ट्रांजैक्शन की हिस्ट्री खंगाली है।

अयोध्या से बाहर जाने पर लगी पाबंदी; बढ़ सकती हैं मुश्किलें
जांच के पहले चरण में ही एसआईटी का यह कड़ा रुख साफ संकेत दे रहा है कि आने वाले दिनों में कुछ बड़े चेहरों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। संदिग्ध कर्मियों और पदाधिकारियों को जिले में ही मौजूद रहने का आदेश इसलिए दिया गया है ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की जा सके और वे साक्ष्यों के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ न कर पाएं। इस बड़ी कार्रवाई के बाद से अयोध्या और लखनऊ के प्रशासनिक व राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है।

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