दुनिया : रूस से ऊर्जा खरीद मामले पर भारत को उपदेश देने वाला अमेरिका हुआ बेनकाब, इस रिपोर्ट में बड़ा खुलासा…

समाचार एजेंसी ने सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि जर्मनी, इटली और चीन उन देशों में शामिल थे जिन्होंने रूस द्वारा निर्यात की जाने वाली ऊर्जा का बड़ा हिस्सा आयात किया. इस डेटा से यह भी पता चला कि अमेरिका ने रूसी ऊर्जा के अपने आयात में भी वृद्धि की और इसकी मात्रा भारत की तुलना में अधिक है.

रूस से भारत को कच्चे तेल की खरीद पर उपदेश देने वाले अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों के पक्षपाती रवैये को उजागर करती हुई एक रिपोर्ट सामने आई है. रूस से ऊर्जा खरीद को लेकर समाचार एजेंसी फाइनेंशियल टाइम्स ने एक वृहद रिपोर्ट छापी है. यह रिपोर्ट विदेश मंत्री एस जयशंकर के उस जवाब को पुष्ट करता है जिसमें उन्होंने हाल ही में अमेरिका में आयोजित दोनों देशों के विदेश मंत्री और स्तर के 2+2 वार्ता के दौरान दिया था.

दरअसल 2+2 वार्ता के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने भारत से अतिरिक्त रूसी तेल नहीं खरीदने का आग्रह किया. इस पर विदेश मंत्री सुब्रमण्यम जयशंकर ने कहा था कि भारत, रूस से एक महीने में उतना ही कच्चा तेल खरीदता है जितना यूरोप दोपहर भर में खरीद लेता है.

समाचार एजेंसी फाइनेंशियल टाइम्स (Financial Times) की रिपोर्ट में रूस से ऊर्जा खरीद के मामले में यूरोपीय देशों पर बड़ा खुलासा किया गया है. रिपोर्ट बताती है कि यूक्रेन में युद्ध की शुरुआत के बाद से, प्रतिबंधों के बावजूद रूसी ऊर्जा कंपनियों ने जहाज और पाइपलाइनों के माध्यम से 68 अरब डॉलर के जीवाश्म ईंधन का निर्यात किया है, जिनमें से अधिकांश यूरोपीय संघ के देशों को किया गया है.

समाचार एजेंसी ने सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि जर्मनी, इटली और चीन उन देशों में शामिल थे जिन्होंने रूस द्वारा निर्यात की जाने वाली ऊर्जा का बड़ा हिस्सा आयात किया. इस डेटा से यह भी पता चला कि अमेरिका ने रूसी ऊर्जा के अपने आयात में भी वृद्धि की और इसकी मात्रा भारत की तुलना में अधिक है.

CREA के मुताबिक, यूरोपीय संघ ने यूक्रेन पर रुसी हमले की शुरुआत के बाद से रूसी जीवाश्म ईंधन के निर्यात का 71% आयात किया है. प्रतिबंधों के बावजूद चार से अधिक ऊर्जा क्षेत्र के दिग्गज तेल कंपनियां पहले ही रूसी ऊर्जा कंपनियों को रूबल में भुगतान कर चुके हैं. इन कार्रवाइयों से पता चलता है कि यूरोपीय राष्ट्र रूसी प्रतिबंधों के संबंध में भारत और अन्य लोगों को जो उपदेश देते हैं, उसका अनुपाल वो खुद नहीं कर रहे हैं.

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