यूपी की 17 सीटों पर महासंग्राम, NDA और INDIA में फिर घमासान, उपचुनाव बदलेगा सियासी समीकरण !

हाल ही में लोकसभा चुनाव के जो नतीजे सामने आए हैं उसके बाद प्रदेश की कई सीटों पर समीकरण बदले हुए नजर आ रहे हैं।

यूपी में लोकसभा चुनावों में इंडिया गठबंधन के बेहतर प्रदर्शन के बाद अब एक बार फिर यूपी में होने वाले विधानसभा उपचुनावों को लेकर सियासत तेज हो गयी है। एक तरफ जहां सपा के 7 बागी विधायकों के खिलाफ अखिलेश यादव ने कड़ा रुख अपनाया है तो वहीं अब दूसरी ओर यूपी में विधानसभा की 10 रिक्त सीटों के लिए सपा ने रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है। यानी यूपी में होने वाली यह सियासी लड़ाई अब कुल 17 विधानसभा सीटों पर होने वाली है।

हालाकिं यूपी में विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस-सपा का गठबंधन महाराष्ट्र और हरियाणा चुनाव पर निर्भर करेगा। अगर कांग्रेस इन दो राज्यों में सपा को सीट देने के लिए तैयार होती है, तभी सपा यूपी विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस के किसी दावे पर विचार करेगी। यूपी में शीघ्र ही विधानसभा की 10 रिक्त सीटों पर चुनाव होने हैं। बता दें कि यूपी में जिन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं उनमें से एक सीट सीसामऊ (कानपुर) से सपा विधायक इरफान सोलंकी को सजा होने से रिक्त हुई है, जबकि नौ विधानसभा सदस्य अब लोकसभा सांसद बन चुके हैं। जिनमें सपा के चार विधायक अखिलेश यादव, अवधेश प्रसाद, लालजी वर्मा और जियाउर रहमान बर्क शामिल हैं।

सपा के इन बागियों पर लटकी तलवार

सपा के जिन 7 विधायकों को लेकर बवाल मचा हुआ है उन्होंने फरवरी में हुए राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग करते हुए बीजेपी कैंडीडेट के समर्थन में वोट किया था। इसमें ऊंचाहार से विधायक मनोज पांडेय, गोसाईगंज से विधायक अभय सिंह, कालपी के विधायक विनोद चतुर्वेदी, चायल से विधायक पूजा पाल, जलालाबाद से विधायक राकेश पांडेय, गौरीगंज से विधायक राकेश प्रताप सिंह और बिसौली से विधायक आशुतोष मौर्य शामिल हैं। बागियों की लिस्ट में वे विधायक भी शामिल हैं जिन्होंने लोकसभा चुनाव में बीजेपी के पक्ष में प्रचार किया था।

बता दें कि समाजवादी पार्टी की याचिका के बाद विधायकों का भविष्य विधानसभा अध्यक्ष के रुख पर निर्भर करेगा। दल-बदल कानून के तहत अध्यक्ष दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का मौका देगा। उसके उस पर निर्णय लिया जायेगा। वहीं सदस्यता खत्म कराने के लिए पार्टी को अध्यक्ष के सामने दिए गए आवेदन के साथ ही इसके लिए पर्याप्त आधार भी देने होते हैं। यदि पर्याप्त आधार मिलते है, तो इन विधायकों की सदस्य्ता समाप्त हो सकती है।

उपचुनावों में बढ़ सकती हैं बीजेपी की मुश्किलें

हाल ही में लोकसभा चुनाव के जो नतीजे सामने आए हैं उसके बाद प्रदेश की कई सीटों पर समीकरण बदले हुए नजर आ रहे हैं। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन पहले के मुकाबले कई सीटों पर मजबूत हुआ है, वहीं 2022 से कई सीटों पर बीजेपी कमजोर हुई है। यूपी की जिन सीटों पर उपचुनाव होना है, वो सीटें हैं फूलपुर, मझवा, मीरापुर, मिल्कीपुर, करहल, कुंदरकी, गाजियाबाद, कटेहरी और खैर विधानसभा सीट. इसके अलावा रायबरेली की ऊंचाहार सीट भी सुर्खियों में हैं क्योंकि इस सीट से विधायक मनोज पांडे अब बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। लेकिन इस सीट को अभी तक ख़ाली घोषित नहीं किया गया है।

वहीं इन सीटों पर बीजेपी की हार के बाद बीजेपी इन सीटों पर काफी कमजोर होती नजर आ रही है। जिसकी वजह से होने वाले उपचुनावों में भी बीजेपी को कुछ मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं अगर NDA व I.N.D.I.A गठबंधन के बीच तालमेल अगर बेहतर बनता है तो लोकसभा चुनावों की तरह ही इन सीटों पर भी चौकाने वाले परिणाम सामने आ सकते हैं।

वहीं यूपी में होने वाले ये विधानसभा उपचुनाव कांग्रेस और सपा के लिए भी किस चुनौती से कम नहीं हैं। कांग्रेस और सपा को इन उपचुनावों में जो भी मनुकसान होता है उनका खामियाजा उन्हें आने वाले विधानभा चुनावों में भी जरूर देखने को मिलेगा। हालाकिं अभी के समीकरणों के अनुसार इन सीटों पर सपा और कांग्रेस की ही मजबूती दिखाई दे रही हैं। लेकिन सत्ता पक्ष की पार्टी बीजेपी को भी किसी से कम आंकना ठीक नहीं होगा।

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