छात्रवृत्ति वितरण में विभागीय अफसरों की बड़ी लापरवाही, 1.65 लाख छात्रों का डाटा फारवर्ड करना भूले अफसर !

बता दें कि छात्रवृत्ति के आवेदन उपरान्त तय प्रक्रिया के तहत पहले सभी संबंधित अभिलेखों और छात्र-छात्रा द्वारा सबमिट किये गए डाटा की ऑनलाइन स्क्रूटनी होती है। इसके बाद संस्था द्वारा सभी छात्र-छात्राओं के आवेदनों को सम्बंधित विभागों (जिला समाज कल्याण विभाग, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग और जनजातीय कल्याण विभाग) के अधोहस्ताक्षरी कार्यालयों को फारवर्ड किया जाता है।

उत्तर प्रदेश में छात्रवृत्ति को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। जानकारी के मुताबिक कुल 1.65 लाख छात्रों का डाटा अफसरों ने फारवर्ड ही नहीं किया जिसके चलते इतनी बड़ी संख्या में छात्रों को छात्रवृत्ति मिलने पर संदेह बरकरार है। दरअसल, पूर्वदशम और दशमोत्तर छात्रवृति के लिए 10 जनवरी तक आवेदन मांगे गए थे। जिसके बाद पूर्वदशम श्रेणी में कुल 2693540 नविन आवेदन विभिन्न विभागों के लिए किये गए थे जिसमें से 1987686 आवेदन फाइनल सबमिट किये गए थे।

उत्तर प्रदेश सरकार की छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति की ऑनलाइन वेबसाइट से प्राप्त जानकारी के मुताबिक पूर्वदशम में कुल 1707062 छात्र-छात्राओं का डाटा संस्था द्वारा फॉरवर्ड किया गया था। वहीं दशमोत्तर श्रेणी में विभिन्न सरकारी और गैर सरकारी शिक्षण संस्थाओं ने कुल 1842852 छात्र-छात्राओं का डाटा अधोहस्ताक्षरी को फॉरवर्ड किया था।

बता दें कि छात्रवृत्ति के आवेदन उपरान्त तय प्रक्रिया के तहत पहले सभी संबंधित अभिलेखों और छात्र-छात्रा द्वारा सबमिट किये गए डाटा की ऑनलाइन स्क्रूटनी होती है। इसके बाद संस्था द्वारा सभी छात्र-छात्राओं के आवेदनों को सम्बंधित विभागों (जिला समाज कल्याण विभाग, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग और जनजातीय कल्याण विभाग) के अधोहस्ताक्षरी कार्यालयों को फारवर्ड किया जाता है।

तदोपरांत अधोहस्ताक्षरी इन आवेदन की दोबारा से जांच करने के बाद राज निदेशालय को सभी छात्र-छात्राओं का डाटा भेजती है। फिर वहां से भुगतान की प्रक्रिया शुरू की जाती है। गौरतलब हो कि यह पूरी प्रक्रिया नियमानुसार प्रत्येक वर्ष 31 मार्च तक पूरी हो जानी चाहिए। 31 मार्च की तिथि बीत जाने के बाद किसी भी आवेदन पर विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाती और विभाग का ही ऐसा मानना होता है कि वित्तीय वर्ष समाप्त हो जाने के बाद समस्त देनदारियां समाप्त मानी जाती हैं।

ऐसे में सवाल यह है कि अगर अफसरों ने 1 लाख 65 हजार छात्र-छात्राओं का आवेदन राज्य निदेशालय को फारवर्ड ही नहीं किया है तब क्या अब इन अवशेष छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि मिल सकेगी जबकि वित्तीय वर्ष भी समाप्त हो चूका है।

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