
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले प्रदेश की राजनीति में दल-बदल का सिलसिला तेज होता दिखाई दे रहा है। गुरुवार को लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी के मुख्यालय में गोंडा के भाजपा नेता भवानी भीख शुक्ला ने अपने पांच बेटों के साथ सपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में हुए इस कार्यक्रम के दौरान समर्थकों ने जय भवानी के नारे भी लगाए।
26 साल से राजनीति में सक्रिय हैं भवानी भीख शुक्ला
भवानी भीख शुक्ला गोंडा के जिला पंचायत सदस्य हैं। उन्हें पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह का करीबी बताया जाता है। वह करीब 26 वर्षों से ब्लॉक प्रमुख पद से जुड़ी राजनीति में सक्रिय हैं। उनकी पत्नी जुगरानी कटरा बाजार की ब्लॉक प्रमुख हैं।
भवानी भीख शुक्ला ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1999 में भाजपा से की थी। इसके बाद 2009 से 2012 तक वह बसपा में रहे और 2012 से 2017 तक समाजवादी पार्टी के साथ जुड़े रहे। वर्ष 2017 में उन्होंने सपा छोड़कर दोबारा भाजपा का दामन थाम लिया था। अब एक बार फिर उन्होंने सपा में वापसी कर ली है।
पांच बेटों के साथ सपा में शामिल हुए भवानी शुक्ला
भवानी भीख शुक्ला के साथ उनके पांच बेटे भगवान शुक्ला, कृष्ण भगवान शुक्ला, शिव भगवान शुक्ला, विष्णु भगवान शुक्ला और शंकर भगवान शुक्ला भी समाजवादी पार्टी में शामिल हुए।
इसके अलावा कई ग्राम प्रधान, जिला पंचायत सदस्य, बीडीसी सदस्य और अन्य समर्थकों ने भी सपा की सदस्यता ग्रहण की। बताया जा रहा है कि भवानी शुक्ला के साथ करीब 2,000 समर्थक गोंडा से लखनऊ पहुंचे। इस दौरान लगभग 300 वाहनों का काफिला भी देखा गया।
विधायक बावन सिंह से विवाद के बाद चर्चा में आए थे भवानी शुक्ला
भवानी भीख शुक्ला कटरा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक बावन सिंह के साथ विवाद के बाद चर्चा में आए थे। शुक्ला का आरोप है कि विधायक उनके परिवार को परेशान कर रहे हैं। उनके मुताबिक, करीब एक साल पहले उनके ब्लॉक में परिवार के साथ मारपीट की गई थी, लेकिन अब तक आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।
भवानी शुक्ला ने दावा किया कि इन घटनाओं से परेशान होकर उन्होंने भाजपा छोड़कर दोबारा समाजवादी पार्टी में शामिल होने का फैसला किया। ये आरोप उनके द्वारा लगाए गए हैं।
2027 चुनाव से पहले सपा के लिए क्या हैं राजनीतिक मायने?
विधानसभा चुनाव 2027 से पहले गोंडा के एक स्थानीय राजनीतिक नेता और उनके समर्थकों का सपा में शामिल होना जिले की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, इस घटनाक्रम का आगामी चुनाव पर क्या असर पड़ेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।









