
प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने देवरिया के गौरी बाजार थाने में लोगों को अवैध रूप से हिरासत में रखने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने तत्कालीन एसएचओ डॉ. महेंद्र कुमार के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अदालत ने राज्य सरकार को पीड़ित याचिकाकर्ताओं को मुआवजा देने का आदेश दिया है। साथ ही जांच के बाद इस रकम की वसूली जिम्मेदार अधिकारी के वेतन से करने को कहा है।
दो से 10 दिन तक अवैध हिरासत में रखने का आरोप
कोर्ट के सामने आए मामले के अनुसार, पुलिस ने याचिकाकर्ता महेंद्र गौर को दो दिन तक हिरासत में रखा था। वहीं, तीन अन्य याचिकाकर्ताओं को 13 अप्रैल 2026 से 23 अप्रैल 2026 तक यानी करीब 10 दिन तक अवैध रूप से हिरासत में रखा गया।
हाईकोर्ट ने इस मामले में तीन याचिकाकर्ताओं को 20-20 हजार रुपये और एक याचिकाकर्ता को 5 हजार रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया है।
जिम्मेदार अधिकारी के वेतन से होगी मुआवजे की वसूली
अदालत ने कहा है कि जांच के बाद अवैध हिरासत के लिए जिम्मेदार अधिकारी की पहचान की जाए और मुआवजे की रकम उसके वेतन से वसूल की जाए। इसके अलावा अधिकारी के सेवा रिकॉर्ड में भी इस अनुचित आचरण को दर्ज करने का निर्देश दिया गया है।
थाने के CCTV फुटेज पर भी कोर्ट की सख्त टिप्पणी
हाईकोर्ट ने इस मामले में थानों में CCTV कैमरों की निगरानी को लेकर सुप्रीम कोर्ट के ‘परमवीर सिंह सैनी बनाम बलजीत सिंह’ फैसले का भी हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि थानों में CCTV कैमरे 24 घंटे चालू रहना जरूरी है।
अदालत के मुताबिक, जिस अवधि में याचिकाकर्ताओं को कथित तौर पर अवैध हिरासत में रखा गया, उस दौरान थाने के CCTV कैमरे बंद मिले और फुटेज भी उपलब्ध नहीं था।
सबूत पेश नहीं करने पर कोर्ट ने माना पुलिस के खिलाफ
हाईकोर्ट ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 119 का उल्लेख करते हुए कहा कि जो साक्ष्य पेश किया जा सकता है, लेकिन उसे पेश नहीं किया जाता, तो उसके बारे में यह माना जा सकता है कि वह साक्ष्य उसे छिपाने वाले व्यक्ति के खिलाफ जाता।
इसी कानूनी सिद्धांत के आधार पर अदालत ने CCTV फुटेज उपलब्ध नहीं होने को गंभीरता से लिया और याचिकाकर्ताओं के अवैध हिरासत के दावे को सही माना। कोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई को नागरिकों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन माना।









