कारनामा : BSC के छात्र को यूपी पुलिस ने बना दिया गांजा तस्कर, बर्थडे पार्टी में आए रिश्तेदार को छोड़ने गया था बाहर

उत्तर प्रदेश की पुलिस पर उंगली उठना आम बात हो गई है। गुनाहगारों के साथ ही साथ बेगुनाहों को मुजरिम बना देने के इल्ज़ाम पुलिस पर लगते रहे हैं। ताजा मामला बांदा का सामने आया है जहां 1 दिन पहले पुलिस ने गांजा तस्करों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से कई कुंटल गांजे की बड़ी खेप की बरामदगी का दावा किया था लेकिन उन्हीं पकड़े गए कथित गांजा तस्करों में एक युवक ऐसा भी निकला जो ना सिर्फ बीएससी का स्टूडेंट है बल्कि घटना के समय वह अपने मेडिकल स्टोर मालिक के घर एक समारोह में मौजूद था। पीड़ित परिजन और मेडिकल स्टोर मालिक आज उच्च अधिकारियों के पास पहुंचे और अपने बेटे को बेगुनाह बताते हुए नए सिरे से जांच करने की मांग की है। वहीं इस मामले में पुलिस के तमाम अधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है और मीडिया के सवालों का जवाब देने से इनकार कर दिया है।

आपको बता दें कि कल बांदा पुलिस ने गांजा तस्करों के एक बड़े रैकेट को पकड़ने का दावा करते हुऐ तकरीबन आधा दर्जन तस्करों को तस्करी के माल समेत मौके से गिरफ्तार किया था लेकिन आज उन्हीं गिरफ्तार लोगों में पलहरी निवासी सोमदत्त के परिजन और क्षेत्रवासी पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे और एसओजी टीम की कार्यशैली और कार्यवाही पर सवालिया निशान लगाया है। सोमदत्त के पीड़ित परिजनों का कहना है कि उनका बेटा बीएससी फाइनल ईयर का स्टूडेंट है और साथ ही आरटीओ कार्यालय के पास स्थित मेडिकल स्टोर में काम करता है। परिजनों का कहना है कि जिस समय पुलिस गांजा तस्करों को गिरफ्तार दिखा रही है उस समय सोमदत्त अपने मेडिकल स्टोर मालिक के बेटे की जन्मदिन पार्टी में था और उन्हीं के मेहमानों को छोड़ने पास के गांव गया था जहां से लौटते समय पुलिस ने उसको उठा लिया और उस पर गांजा तस्कर का झूठा मुकदमा बना दिया।

परिजनों के मुताबिक उनको रात में ही जानकारी मिली उनके बेटे को जीप में कुछ लोग जबरन ले गए हैं जिस पर उन्होंने 112 डायल किया साथ ही पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट भी लिखवाई लेकिन अगले दिन उनको पता चला कि उनके बेटे को गांजा तस्करी में फंसा दिया गया है। ऐसे ही कुछ बात मेडिकल स्टोर इंचार्ज मालिक अनिल वर्मा ने भी की है मेडिकल स्टोर मालिक का कहना है कि घटना वाले समय सोमदत्त उनके घर में उनके बेटे के बर्थडे पार्टी में मौजूद था जिसकी वीडियो और फोटो मौजूद हैं। पीड़ित परिजनों का कहना है कि सोमदत्त को फर्जी तरीके से पुलिस की एसओजी ने फसाया है जिसकी जांच होना चाहिए और निर्दोष को बाइज्जत रिहा किया जाना चाहिए वहीं इस मामले में पुलिस का कोई भी जिम्मेदार मीडिया से बात करने को ही तैयार नहीं है।

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