
बीती 20 मई को राजा भैया के प्रभाव वाले इलाके प्रतापगढ़, कौशांबी और और उसके आसपास लोकसभा सीटों पर शांतिपूर्ण मतदान सम्पन्न हो गया. इस दौरान राजा भैया की रहस्यमयी चुप्पी सत्ता पक्ष और विपक्ष को सकते में डाल गई. राज्यसभा चुनाव में खुलकर भाजपा का समर्थन करने वाले जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया के लोकसभा चुनाव में किसी भी राजनीतिक दल का समर्थन न करने के निर्णय के बड़े मतलब निकाले जा रहे हैं.
प्रतापगढ़ के कुंडा इलाके में मौजूद रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की बेंती कोठी का राजनीतिक तापमान 14 मई को अचानक गरम हो गया था. इसी दिन शाम को जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह ने बेंती कोठी में अपनी पार्टी के पदाधिकारियों की बैठक बुलाने का ऐलान कर दिया. माना जा रहा था कि इस बैठक में राजा भैया लोकसभा चुनाव के लिए अपना समर्थन जाहिर कर सकते हैं. इसे देखते हुए सुबह प्रतापगढ़ से सटी कौशाम्बी लोकसभा सीट के समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी पुष्पेंद्र सरोज अपने पिता और मंझनपुर विधानसभा सीट से सपा विधायक इंद्रजीत सरोज, राजा भैया की कोठी पहुंच गए तो शाम को केंद्रीय मंत्री और मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार संजीव बालियान कौशाम्बी सीट से भाजपा प्रत्याशी विनोद सोनकर के साथ बेंती कोठी पहुंचे.

राजा भैया ने समर्थन मांगने आए दोनों दलों के नेताओं से पार्टी की मीटिंग में ही निर्णय लेने की जानकारी दी. बेंती कोठी में 14 मई को शाम पांच बजे शुरू होने वाली बैठक में पार्टी के विधान परिषद सदस्य अक्षय प्रताप सिंह उर्फ गोपालजी, बाबागंज विधायक विनोद सरोज, पूर्व सांसद शैलेंद्र कुमार, पूर्व चेयरमैन सहकारी बैंक डॉ. केएन ओझा और पार्टी के जिला प्रभारी राम अचल वर्मा समेत अन्य नेता पहुंच चुके थे. बैठक में रघुराज प्रताप ने कहा कि लोकसभा चुनाव आया तो किन्हीं कारणों से दूसरे दलों से गठबंधन नहीं हो सका. इस वजह से जनसत्ता दल के झंडे के तले चुनाव नहीं लड़ा गया. कार्यकर्ता और समर्थक किसी भी दल के पक्ष में मतदान करने के लिए स्वतंत्र हैं. उन्होंने कहा, परिवार के सदस्यों के विचार अलग हो सकते हैं. इसे लेकर किसी के बीच टकराव नहीं होना चाहिए.
लोकसभा चुनाव से पहले हुए राज्यसभा चुनाव में भी रघुराज प्रताप राजनीतिक दलों के केंद्र बिंदु बन गए थे. सपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम ने रघुराज की लखनऊ स्थित कोठी पहुंचकर अपनी पार्टी के राज्यसभा उम्मीदवारों के लिए समर्थन मांगा था. इसके बाद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने भी उनसे मुलाकात कर भाजपा उम्मीदवारों के लिए उनका समर्थन मांगा था. आखिरकार रघुराज प्रताप ने भाजपा नेताओं की मनुहार सुन ली और भाजपा के राज्यसभा सदस्यों के समर्थन का ऐलान किया था. राज्यसभा चुनाव के दौरान सपा विधायकों में हुई टूट के पीछे भी वे अहम कड़ी थे. ऐसे में यह उम्मीद जताई जा रही थी कि रघुराज की पार्टी के साथ भाजपा का गठबंधन हो सकता है. उनके करीबी यह मान रहे थे कि इस बार के लोकसभा चुनाव में जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के झंडे तले भी प्रत्याशी प्रतापगढ़ या कौशाम्बी लोकसभा सीट से लड़ता दिख सकता है. जानकारी के मुताबिक भाजपा जनसत्ता दल लोकतांत्रिक को एक से ज्यादा सीट देने को तैयार नहीं थी और एक वरिष्ठ भाजपा नेता की रघुराज प्रताप से नाराजगी के चलते भी गठबंधन को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका. इस पूरे घटनाक्रम से भी रघुराज का खेमा भाजपा से नाराज था.

छह बार निर्दलीय विधायक बनने वाले रघुराज प्रताप ने 30 नवंबर 2018 को अपनी पार्टी बनाई थी. वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में पहली बार पार्टी ने भागीदारी की थी. उस चुनाव में प्रतापगढ़ से अक्षय प्रताप सिंह और कौशाम्बी से शैलेंद्र कुमार को चुनाव मैदान में उतारा गया था. लेकिन दोनों को ही हार मिली. पार्टी ने 2022 के विधानसभा चुनाव में भी प्रत्याशी खड़े किए थे. पार्टी 24 सीटों पर लड़ी थी, जिनमें रघुराज समेत दो उम्मीदवार जीतकर विधानसभा पहुंचे थे. हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में राजा भैया की पार्टी एक भी सीट पर चुनाव नहीं लड़ रही है लेकिन दो प्रमुख दलों के प्रत्याशियों के समर्थन मांगने पर ऊपरी तौर पर उन्होंने साफ किया कि इस चुनाव में जनसत्ता दल लोकतांत्रिक की “ना काहू से दोस्ती, न काहू से बैर” की रणनीति है. असल में कौशाम्बी सीट के राजनीतिक समीकरण पर रघुराज का प्रभाव जाहिर है. इस सीट का चुनावी समीकरण यहां की तीन विधानसभा सिराथू, मंझनपुर और चायल के अलावा प्रतापगढ़ की दो विधानसभा बाबागंज और कुंडा तय करती है. राजनैतिक विश्लेषक बताते हैं, रघुराज प्रताप का कुंडा, बाबागंज विधानसभा सीट और आसपास के क्षेत्रों में मजबूत जनाधार है. उनके समर्थकों का एक बड़ा समूह है, जो किसी भी चुनाव में एक निर्णायक भूमिका निभा सकता है. इसके अलावा क्षेत्र में उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता और प्रभाव का असर भी चुनाव को प्रभावित करता रहा है. यही कारण है कि वह कुंडा विधानसभा से लगातार सातवीं बार विधायक है.
वहीं बाबागंज विधानसभा सीट से विनोद सरोज वर्ष 2007 से लगातार चौथी बार विधायक हैं तो इससे पूर्व विनोद के पिता रामनाथ सरोज यहां से विधायक रहे. वह भी रघुराज समर्थित रहे. रामेश्वर मिश्र बताते हैं, “कुंडा और बाबागंज विधानसभा में जिस प्रत्याशी को जनता जनार्दन का आशीर्वाद मिल जाता है, उसके सिर पर ही कौशाम्बी लोकसभा सीट का ताज सजता है. इन दोनों विधानसभाओं पर रघुराज प्रताप सिंह का खासा प्रभाव कई वर्षों से है. इसलिए उनका रुख हमेशा अहम रोल निभाता है. तीन बार इनके करीबी शैलेंद्र कुमार सांसद भी रह चुके हैं. पिछले एक महीने से कौशाम्बी लोकसभा सीट की राजनीति राजा भैया के इर्दगिर्द घूम रही है. इसी दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लखनऊ प्रवास के दौरान 2 मई को राजा भैया से इनकी मुलाकात प्रस्तावित थी. लेकिन राजा भैया के अचानक प्रदेश से बाहर चले जाने के कारण यह मुलाकात नहीं हो पायी. तीन दिन बाद 5 मई को दोनों नेताओं की बेंगलुरु में मुलाकात हुई. दोनों नेताओं ने बंद कमरे में करीब एक घंटे तक यूपी के सियासी हालात पर चर्चा की जिसमें क्षत्रियों की नाराजगी दूर करते और कौशाम्बी सीट पर भाजपा उम्मीदवार का समर्थन करने जैसे अहम मुद्दे थे. इसके बाद 14 मई को पार्टी नेताओं के साथ बैठक के बाद रघुराज ने सब कुछ समर्थकों पर छोड़कर प्रदेश और खासकर कौशाम्बी सीट पर राजनीतिक तपिश और बढ़ा दी है.

वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी विनोद सोनकर को 3,83,009, सपा प्रत्याशी इंद्रजीत सरोज को 3,44,287 और जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के प्रत्याशी शैलेंद्र कुमार को 1,56,406 वोट हासिल हुए थे. इस तरह सपा उम्मीदवार की हार में जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के प्रत्याशी को मिले मतों की बड़ी भूमिका थी. अगर इन मतों के चौथाई भी सपा उम्मीदवार इंद्रजीत सरोज को मिल जाते तो उनकी संसद पहुंचने की राह आसान हो सकती थी. वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में कौशाम्बी सीट से भाजपा ने दो बार के सांसद विनोद सोनकर को तीसरी बार चुनाव मैदान में उतारा है. सपा ने पांच बार के विधायक और पूर्व मंत्री इंद्रजीत सरोज के बेटे पुष्पेंद्र सरोज पर दांव चला है. बसपा ने शुभ नारायण गौतम को टिकट दिया है. कुंडा और बाबागंज विधानसभा क्षेत्र में रघुराज समर्थकों और कौशाम्बी सांसद विनोद सोनकर के बीच तनातनी जगजाहिर है. मंगलवार को केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान और सांसद विनोद सोनकर रघुराज प्रताप से मिलने पहुंचे थे, लेकिन बातचीत बेनतीजा ही निकली.
जनसत्ता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह के इस फैसले के बाद कौशाम्बी लोकसभा के साथ ही प्रतापगढ़ संसदीय सीट के चुनावी समीकरण बदले से नजर आ रहे हैं. इस फैसले ने भाजपा और सपा प्रत्याशी की धड़कनें तेज कर दी हैं. 15 मई को बुधवार को प्रतापगढ़ संसदीय सीट से सपा प्रत्याशी एसपी सिंह पटेल उनसे मिलने बेंती पहुंचे. राजा भैया से करीब आधे घंटे तक लोकसभा चुनाव को लेकर चर्चा हुई लेकिन इसके नतीजे को लेकर दोनों पक्ष चुप्पी साधे हुए हैं. राजा भैया की पार्टी के निर्णय से एक बात तो साफ हो चुकी है कि कौशाम्बी सीट पर भाजपा उम्मीदवार के लिए जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के समर्थकों का समर्थन पाना बेहद कठिन होगा. इससे विनोद सोनकर को चुनाव में काफी नुकसान हो सकता है.
लेखक – मुनीष त्रिपाठी,पत्रकार, इतिहासकार और साहित्यकार









