चंपत राय के लिए ‘मौत की सजा’ भी कम है, उन्हें आजीवन कारावास मिले, गोविंद गिरी की भी हो जांच, करपात्री महाराज का बड़ा हमला

अयोध्या: राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्रित किए गए धन में गबन के आरोपों ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। इस बार करपात्री महाराज ने ‘भारत समाचार’ से बातचीत में बेहद गंभीर और सनसनीखेज खुलासे किए हैं, जिससे मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। करपात्री महाराज ने न केवल चंपत राय, बल्कि कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी पर भी सीधे तौर पर भ्रष्टाचार में संलिप्त होने का आरोप लगाया है।

करपात्री महाराज ने चंपत राय पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके लिए ‘मौत की सजा’ भी कम है, उन्हें आजीवन कारावास दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी भी इस चोरी में बराबर के भागीदार हैं, उनकी मानसिक स्थिति और इस मामले में उनकी भूमिका की गहन जांच होनी चाहिए।” महाराज का दावा है कि चंपत राय ट्रस्ट में अपनी ‘डिक्टेटरशिप’ चला रहे थे और पीएमओ तक की बातों को नजरअंदाज करते थे।

इतना ही नहीं, महाराज ने अयोध्या के उस सुनार पर भी कड़ी कार्रवाई की मांग की है, जिस पर कम पैसे लेकर सोना गलाने और गबन में शामिल होने का संदेह है। उन्होंने एसआईटी (SIT) की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया है कि उन्हें क्लीनचिट देने की कोशिश की जा रही है।

करपात्री महाराज ने स्पष्ट किया कि वे किसी के दबाव में नहीं हैं और न ही किसी को बचा रहे हैं। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि जांच के घेरे में आए तीनों आरोपी जेल जाएंगे और वे किसी भी कीमत पर बच नहीं पाएंगे। अब सबकी निगाहें 22 जुलाई को होने वाली बैठक पर टिकी हैं, जिसमें महाराज ने और भी बड़े खुलासे करने का दावा किया है। यह मामला अब केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह मंदिर ट्रस्ट की साख और भविष्य के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

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