
राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य नागरिक अलंकरण समारोह-II में उत्तर प्रदेश की कला, संस्कृति, कृषि और शिक्षा की समृद्ध विरासत को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर सर्वोच्च पहचान मिली है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने वर्ष 2026 के लिए देश के प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कार प्रदान किए, जिसमें उत्तर प्रदेश की चार अनमोल विभूतियों को ‘पद्मश्री’ सम्मान से अलंकृत किया गया। उत्तर प्रदेश की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर पोस्ट साझा कर सभी सम्मानित दिग्गजों को हार्दिक बधाई दी और कहा कि इन हस्तियों ने देश और दुनिया में उत्तर प्रदेश का मान बढ़ाया है।
पद्मश्री सम्मान पाने वालों में कला के क्षेत्र से वाराणसी के चिरंजी लाल यादव का नाम शामिल है। पिछले पांच दशकों से ‘कांसा नक्काशी’ की समृद्ध कला को सहेजने और उसे वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने में उनका योगदान अमूल्य है। वहीं, कला क्षेत्र में ही लखनऊ के प्रख्यात रंगकर्मी और विद्वान डॉ. अनिल कुमार रस्तोगी को भी पद्मश्री से नवाजा गया है। अनिल रस्तोगी ने 1,000 से अधिक नाट्य प्रस्तुतियों और वैश्विक नाट्य महोत्सवों के माध्यम से भारतीय रंगमंच को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवभूषित किया है।
पारंपरिक बीज और संगीत साधना को मिला राष्ट्रीय सम्मान
कृषि के क्षेत्र में अद्वितीय और जीवनपर्यंत योगदान देने वाले स्व. रघुपत सिंह को मरणोपरांत ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया गया। रघुपत सिंह ने पांच दशकों से अधिक समय तक पारंपरिक बीजों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया, जिससे लाखों किसानों का जीवन समृद्ध हुआ। उनका यह योगदान आत्मनिर्भर कृषि और जैव विविधता के क्षेत्र में हमेशा प्रेरणास्रोत बना रहेगा।
साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की सुप्रसिद्ध संगीतविद् एवं शिक्षाविद् प्रो. मंगला कपूर को पद्मश्री से अलंकृत किया गया। प्रो. मंगला कपूर ने संगीत के क्षेत्र में दुर्लभ रागों का दस्तावेजीकरण करने के साथ-साथ 40 से अधिक मौलिक रचनाओं का संकलन किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इन सभी विभूतियों के परिश्रम को नमन करते हुए कहा कि यह सम्मान उनके अथक परिश्रम, उत्कृष्ट संस्कारों और समर्पित साधना का एक राष्ट्रीय अभिनंदन है, जिससे पूरा उत्तर प्रदेश गौरवान्वित महसूस कर रहा है।









