सोने-चांदी में अचानक आया भूचाल, चांदी ₹8,500 से ज्यादा उछली, सोना भी ₹1.42 लाख के पार; जानें तेजी की असली वजह…

लगातार तीन हफ्तों की गिरावट के बाद 30 जून को सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल दर्ज किया गया है। MCX पर अगस्त डिलीवरी वाला सोना ₹1,42,402 के हाई लेवल पर पहुंच गया, जबकि जुलाई डिलीवरी वाली चांदी में ₹8,500 से अधिक की भारी तेजी आई है। जानिए वैश्विक और घरेलू बाजारों में आई इस अचानक तेजी के मुख्य कारण।

सर्राफा बाजार और कमोडिटी मार्केट से इस वक्त की एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। पिछले लगातार तीन हफ्तों से सोने और चांदी की कीमतों में जारी गिरावट के सिलसिले पर मंगलवार, 30 जून को अचानक ब्रेक लग गया। दोपहर दो बजे के बाद घरेलू और वैश्विक बाजारों में अचानक आई जोरदार लिवाली (Buying Support) के चलते सोने और चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल देखा गया है। भारतीय वायदा बाजार (MCX) पर जहां चांदी अचानक ₹8,500 से ज्यादा महंगी हो गई, वहीं सोने ने भी अपने दिन के उच्चतम स्तर को छू लिया।

MCX और वैश्विक बाजार कॉमेक्स (COMEX) पर कीमतों का हाल

अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स पर सोना 2.60 डॉलर उछलकर 4,040 डॉलर प्रति औंस के पार ट्रेड करता दिखा, जबकि चांदी 1.52 फीसदी की तेजी के साथ 60 डॉलर के करीब पहुंच गई।

इसका सीधा और बड़ा असर भारतीय बाजार (MCX) पर देखने को मिला। एमसीएक्स पर अगस्त डिलीवरी वाला सोना ₹1,952 की छलांग लगाकर ₹1,42,402 प्रति 10 ग्राम के दिन के उच्च स्तर पर पहुंच गया। वहीं, चांदी की बात करें तो जुलाई डिलीवरी वाली चांदी में ₹8,574 का जबरदस्त उछाल आया। चांदी ₹2,23,899 प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रही थी, जबकि दिन के दौरान इसने ₹2,27,980 का हाई लेवल भी छुआ।

अचानक क्यों आई बाजार में यह तेजी?

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, इस अचानक आई तेजी के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण काम कर रहे हैं:

  1. अमेरिका से आए हालिया पीसीई (PCE) महंगाई आंकड़ों के उम्मीद के मुताबिक रहने से निवेशकों को राहत मिली है कि ब्याज दरों में तुरंत बढ़ोतरी नहीं होगी, जिससे सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ गई।
  2. ग्लोबल मार्केट और खासकर तकनीकी (Tech) शेयरों में चल रहे उतार-चढ़ाव के कारण बड़े फंड्स और निवेशकों ने इक्विटी से पैसा निकालकर दोबारा कमोडिटी का रुख किया है।
  3. लगातार तीन हफ्तों की गिरावट के बाद सोना-चांदी तकनीकी रूप से ‘ओवरसोल्ड जोन’ में थे, जहां निचले स्तरों पर निवेशकों को वैल्यू बाइंग का मौका मिला और शॉर्ट कवरिंग की वजह से कीमतों को अचानक सपोर्ट मिल गया।

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