
उत्तर प्रदेश के झांसी में भारतीय जनता पार्टी की रणनीति को बड़ा झटका लगने की बात सामने आई है। नगर निगम कार्यकारिणी के चुनाव में भाजपा की अधिकृत उम्मीदवार रितिका तिवारी को बागी प्रत्याशी नीता यादव के हाथों हार का सामना करना पड़ा। नीता यादव ने विपक्षी पार्षदों और भाजपा के नाराज पार्षदों के समर्थन के बीच तीन वोट के अंतर से जीत दर्ज की। चुनाव में नीता यादव को 9 वोट मिले, जबकि रितिका तिवारी को 6 वोट ही हासिल हुए।
मान-मनौव्वल के बाद भी नहीं थमी बगावत
झांसी नगर निगम कार्यकारिणी का चुनाव गुरुवार को राजनीतिक अखाड़ा बन गया। कार्यकारिणी सदस्य के लिए नाम नहीं आने के बाद नीता यादव ने विरोध शुरू कर दिया था। इसके बाद उन्होंने विपक्षी पार्षदों को अपने पाले में करने के साथ भाजपा के नाराज पार्षदों को भी क्रॉस वोटिंग के लिए राजी किया।
संगठन की पसंद रितिका तिवारी को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। उनकी हार के बाद भाजपा संगठन की रणनीति पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
प्रत्याशी नहीं बनाए जाने पर सामने आई नाराजगी
भाजपा की ओर से प्रत्याशी नहीं बनाए जाने के बाद पार्षद नीता यादव और अरविंद खटीक की नाराजगी सामने आई। दोनों ने नामांकन पत्र लिया और नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू की।
इस दौरान कांग्रेस पार्षद सुलेमान मंसूरी बागी अरविंद खटीक के प्रस्तावक बने। वहीं, नीता यादव की प्रस्तावक भाजपा की नाराज चल रही पार्षद ममता पाल बनीं। नीता यादव ने सुबह 11:57 बजे अपना पर्चा जमा किया। इसके बाद नगर निगम में राजनीतिक बयानबाजियों का दौर तेज हो गया।
विपक्ष के पार्षदों ने नीता यादव का दिया साथ
भाजपा में बगावत के बाद नीता यादव के समर्थन में विपक्ष भी एकजुट होता दिखाई दिया। विपक्ष के 15 में से 14 पार्षद मौजूद थे। इनमें से चार वोट नीता यादव के लिए तय किए गए। अरविंद खटीक भी नीता यादव के पक्ष में आ गए।
वहीं, प्रत्याशी नहीं बनाए जाने से नाराज पार्षदों की क्रॉस वोटिंग ने नीता यादव की जीत का रास्ता साफ कर दिया। नतीजे में नीता यादव को 9 वोट मिले और भाजपा की अधिकृत प्रत्याशी रितिका तिवारी को 6 वोट मिले।
बसपा उम्मीदवार महेश गौतम को सबसे ज्यादा वोट
झांसी नगर निगम कार्यकारिणी चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार महेश गौतम को सबसे अधिक वोट मिला। वह तीसरी बार कार्यकारिणी का चुनाव लड़ रहे थे।
इसके अलावा भाजपा के रामजी यादव, सुनील नैनवानी, राखी परिहार और राजकुमारी वर्मा को भी जीत मिली। हालांकि, चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा भाजपा की अधिकृत प्रत्याशी रितिका तिवारी की हार को लेकर हुई।
नीता यादव की जीत के बाद ‘यादव कार्ड’ की चर्चा
नगर निगम कार्यकारिणी में नीता यादव की जीत के बाद इसे भाजपा की सोशल इंजीनियरिंग से जोड़कर देखा जा रहा है। चर्चा है कि नीता यादव के जरिए यादव चेहरे को जीत दिलाने के लिए पार्टी के कुछ पार्षदों ने वोट किया।
रामजी यादव को भाजपा ने पहले से उम्मीदवार बनाया था। अब उनकी बहन नीता विकास यादव भी कार्यकारिणी सदस्य चुन ली गई हैं।
आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति से जोड़कर देखी जा रही जीत
नीता यादव की जीत को भाजपा की आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। पड़ोसी मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव के सत्ता में होने के कारण इन इलाकों में यादव वर्ग को पार्टी के पाले में लाने की कोशिश की चर्चा है।
रितिका तिवारी को उम्मीदवार बनाए जाने और इसके बाद नीता यादव की जीत को लेकर भी अलग-अलग राजनीतिक चर्चाएं सामने आ रही हैं।









