
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे सैन्य और कूटनीतिक टकराव को लेकर एक बहुत बड़ा खुलासा हुआ है। प्रतिष्ठित अमेरिकी अखबार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ चल रहे लंबे सैन्य संघर्ष से बाहर निकलने का रास्ता तलाश रहे हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यदि तेहरान सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से फिर से खोल देता है, तो अमेरिकी प्रशासन न्यूक्लियर मुद्दे को फिलहाल किनारे रखकर अपनी जीत का ऐलान करने के लिए तैयार हो सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने इस दिशा में पिछले कुछ हफ्तों से अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं और अपने वरिष्ठ सहयोगियों को निजी तौर पर संकेत दिए हैं कि वह तेहरान के साथ किसी औपचारिक परमाणु समझौते के बिना भी इस संघर्ष से पीछे हट सकते हैं। हालांकि, स्थिति को संभालना इतना आसान नहीं है क्योंकि ईरान की तरफ से पानी के इस रास्ते को शुरू करने के बदले में भारी-भरकम शर्तें रखी जा रही हैं। तेहरान अरबों डॉलर के हर्जाने, अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी खत्म करने, अमेरिकी सैन्य बलों की पूरी तरह से वापसी और आर्थिक प्रतिबंधों से छूट जैसी बड़ी मांगें कर रहा है।
ईरान ने अपनी मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं का इस्तेमाल कर इस संकीर्ण समुद्री कॉरिडोर से कमर्शियल शिपिंग को धीमा कर दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। हालांकि ट्रंप ने हाल ही में दावा किया था कि स्ट्रेट पूरी तरह खुला है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट रही है। इसी बीच, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के एक जहाज पर मिसाइल हमले की खबर और ईरान के शीर्ष अधिकारियों द्वारा रखी गई कड़ी शर्तों ने कूटनीतिक उम्मीदों को और जटिल बना दिया है।
अमेरिका के भीतर आगामी मिडटर्म चुनावों को देखते हुए भी राजनीतिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल की बढ़ी हुई कीमतों के कारण प्रशासन अमेरिकी मतदाताओं को यह दिखाने के लिए उत्सुक है कि इस सैन्य अभियान ने अपने मुख्य लक्ष्य हासिल कर लिए हैं। ट्रंप का मानना है कि मई 2025 में अमेरिकी हमलों द्वारा ईरान की प्रमुख परमाणु सुविधाओं को नुकसान पहुँचाए जाने के बाद, उनके कार्यकाल में ईरान दोबारा परमाणु हथियार विकसित नहीं कर पाएगा।
यही वजह है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री यातायात पूरी तरह से बहाल हो जाता है और परमाणु खतरा नियंत्रण में रहता है, तो वाशिंगटन किसी फॉर्मल न्यूक्लियर डील की जिद छोड़कर पीछे हटने का रास्ता अपना सकता है। बहरहाल, ईरान की आर्थिक मांगें और प्रतिबंध हटाने की शर्तें इस संभावित समझौते के रास्ते में अभी भी सबसे बड़ा रोड़ा बनी हुई हैं।









