NFHS ने जारी किए आंकड़े, भारत में अस्पताल में पैदा होने वाले बच्चों की तादाद बढ़ी, कुल प्रजनन दर में दर्ज की गई कमी!

NFHS-5 सर्वेक्षण की रिपोर्ट में यह भी जानकारी दी गई है कि भारत में अस्पताल में पैदा होने वाले बच्चों की संख्या 79% से बढ़कर 89% हो गई हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग संस्थागत जन्म दर 87% है जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 94% पहुंच चूका है.

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) ने बीते दिनों प्रजनन दर को लेकर आंकड़े जारी किये. NFHS के आंकड़ों में मुताबिक भारत में प्रति महिला बच्चों की औसत संख्या, राष्ट्रीय स्तर पर 2.2 से गिरकर 2.0 हो गई है. NFHS के अनुसार भारत की कुल प्रजनन दर (TFR) 2.2 से गिरकर 2.0 हो गई है. भारत में केवल पांच राज्य ऐसे हैं जो कुल प्रजनन दर के न्यूनतम आंकड़े से ऊपर स्थित हैं.

स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी NFHS-5 की राष्ट्रीय रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में प्रजनन दर 2.98, मेघालय में 2.91, उत्तर प्रदेश में 2.35, झारखंड में 2.26 और मणिपुर में 2.17 है. ये पांच राज्य कुल प्रजनन दर के न्यूनतम आंकड़े यानी 2.1 से अधिक है. शेष राज्यों की प्रजनन दर 2.1 से कम ही है.

दरअसल, NFHS का मुख्य उद्देश्य भारत में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण और अन्य उभरते क्षेत्रों से संबंधित विश्वसनीय और तुलनीय डेटा प्रदान करना है. NFHS-5 राष्ट्रीय रिपोर्ट, NFHS-4 (2015-16) से NFHS-5 (2019-21) तक के परिवर्तन और सामान्य ऑब्जर्वेसंस (Observations) का सूचीबद्ध संकलन है.

NFHS-5 सर्वेक्षण की रिपोर्ट में यह भी जानकारी दी गई है कि भारत में अस्पताल में पैदा होने वाले बच्चों की संख्या 79% से बढ़कर 89% हो गई हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग संस्थागत जन्म दर 87% है जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 94% पहुंच चूका है.

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