विश्व हाइपरटेंशन दिवस पर पंजाब सरकार का बड़ा कदम, ‘साइलेंट किलर’ के खिलाफ बना त्रिस्तरीय सुरक्षा कवच, 1 करोड़ से अधिक लोगों की हुई मुफ्त जांच

विश्व हाइपरटेंशन दिवस के मौके पर पंजाब की भगवंत मान सरकार ने 'साइलेंट किलर' कहे जाने वाले हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) के खिलाफ जंग को और तेज कर दिया है।

Chandigarh : विश्व हाइपरटेंशन दिवस के मौके पर पंजाब की भगवंत मान सरकार ने ‘साइलेंट किलर’ कहे जाने वाले हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) के खिलाफ जंग को और तेज कर दिया है। राज्य सरकार ने ‘सीएम दी योगशाला’, ‘आम आदमी क्लीनिक’ और ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के जरिए एक ऐसा मजबूत हेल्थकेयर मॉडल तैयार किया है, जो मरीजों को बीमारी से बचाव, शुरुआती पहचान और मुफ्त इलाज की पूरी गारंटी दे रहा है।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों को साझा करते हुए पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि अब तक राज्यव्यापी अभियान के तहत 1 करोड़ से अधिक लोगों की हाइपरटेंशन स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जिनमें से 24 लाख से ज्यादा मरीजों को समय पर इलाज और मुफ्त दवाइयों के दायरे में लाया गया है।

तीन मोर्चों पर हाइपरटेंशन से जंग
पंजाब सरकार ने इस गंभीर बीमारी को रोकने के लिए राज्य में तीन स्तरीय रणनीति लागू की है:

रोकथाम (सीएम दी योगशाला): गलत खानपान और तनाव से निपटने के लिए राज्य में 10,600 से अधिक मुफ्त योग कक्षाएं चलाई जा रही हैं, जिसमें लगभग 3 लाख लोग योग और तनाव प्रबंधन सीख रहे हैं।

शुरुआती पहचान (आम आदमी क्लीनिक): राज्य के 990 आम आदमी क्लीनिकों पर 30 साल से अधिक उम्र के लोगों की नियमित रूप से मुफ्त जांच की जा रही है, ताकि बीमारी का पता पहली स्टेज में ही लगाया जा सके।

कैशलेस इलाज (मुख्यमंत्री सेहत योजना): अगर हाइपरटेंशन के कारण मरीज को स्ट्रोक, हार्ट फेल्योर या किडनी की बीमारी होती है, तो ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत उसका पूरा इलाज कैशलेस और मुफ्त किया जा रहा है।

युवाओं को भी चपेट में ले रही है बीमारी
पटियाला के सरकारी मेडिकल कॉलेज और राजिंद्रा अस्पताल में कार्डियोलॉजी विभाग के हेड डॉ. सौरभ शर्मा ने चेतावनी दी है कि हाइपरटेंशन अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहा। आज के दौर में मानसिक तनाव, खराब जीवनशैली और कसरत की कमी के कारण 20 से 30 साल के युवा और किशोर भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।

राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के मुताबिक, पंजाब के पटियाला, जालंधर, होशियारपुर, अमृतसर और लुधियाना जैसे जिलों में महिलाओं और पुरुषों दोनों में इसके मामले तेजी से बढ़े हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ जैसी पहलों के कारण अब मध्यमवर्गीय परिवार और बुजुर्ग बिना किसी आर्थिक डर के समय पर अस्पताल पहुंच रहे हैं, जिससे कई लोगों की जान बचाई जा सकी है।

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