
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय की मुलाकात के बाद परिसीमन बिल को लेकर विजय के रुख में बदलाव की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। अब कांग्रेस ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा है कि विजय के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है।
कांग्रेस नेता संतोष सिंह सलूजा ने कहा कि विजय पहले भी यही मांग कर रहे थे कि किसी भी राज्य की लोकसभा सीटें कम नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सीटों की संख्या कम नहीं करने की बात करना वही पुराना रुख है, क्योंकि उनकी पार्टी का फिलहाल संसद में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है।
कांग्रेस ने परिसीमन बिल को लेकर सरकार पर साधा निशाना
कांग्रेस नेता ने कहा कि विपक्ष परिसीमन बिल का विरोध नहीं कर रहा है, बल्कि महिला आरक्षण बिल के साथ परिसीमन को जोड़ने के तरीके का विरोध किया गया था। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण बिल सितंबर 2023 में पास हो चुका था और विपक्ष चाहता था कि इसे 2024 से लागू किया जाए, लेकिन सरकार ने इसे परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ दिया।
जेडीयू ने बताया मुलाकात को सकारात्मक
वहीं, जेडीयू ने अमित शाह और थलपति विजय की मुलाकात को सकारात्मक बताया है। जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि तमिलनाडु के हितों से समझौता करने का कोई सवाल नहीं है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पहले भी स्पष्ट कर चुकी है कि परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। परिसीमन की प्रक्रिया में सभी राज्यों के हितों का ध्यान रखा जाएगा और तमिलनाडु को उसका उचित हिस्सा मिलेगा।
परिसीमन को लेकर जारी है राजनीतिक बहस
परिसीमन प्रक्रिया को लेकर दक्षिणी राज्यों की चिंताओं के बीच राजनीतिक दल लगातार अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कांग्रेस जहां विजय के पुराने रुख पर कायम रहने की बात कह रही है, वहीं जेडीयू का कहना है कि केंद्र सरकार राज्यों के हितों को ध्यान में रखकर फैसला करेगी।








