
भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर एक बेहद बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। भारत में ऑस्ट्रिया के राजदूत रॉबर्ट ज़िशग ने मंगलवार को पुष्टि की है कि यह विशाल व्यापार समझौता अब आधिकारिक रूप से “कानूनी जांच” के अंतिम और बेहद महत्वपूर्ण दौर में प्रवेश कर चुका है। इस साल दिसंबर के मध्य में ब्रुसेल्स में आयोजित होने वाली यूरोपीय परिषद की बैठक के दौरान इस पर औपचारिक हस्ताक्षर होने की प्रबल उम्मीद है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हो सकते हैं।
जनवरी की समिट और G7 बैठक ने बढ़ाई रफ़्तार
राजदूत ज़िशग ने बताया कि यह समझौता साल 2008 से ही प्रक्रिया में था, लेकिन इस साल जनवरी में नई दिल्ली में हुई हाई-प्रोफाइल भारत-EU समिट ने इसके लिए एक बड़े कैटलिस्ट का काम किया। इसके बाद फ्रांस के एवियन में आयोजित 52वें G7 समिट के दौरान भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरोपीय कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा के साथ उच्च स्तरीय मुलाकात की। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने भी प्रेस ब्रीफिंग में इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि दोनों पक्ष साल के अंत से पहले इस पर हस्ताक्षर करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
क्या है ‘लीगल स्क्रबिंग’ और क्या होगा इसका असर?
ऑस्ट्रियन दूत ने समझाया कि वर्तमान में चल रही ‘लीगल स्क्रबिंग’ के तहत तकनीकी टीमें सैकड़ों पन्नों के कानूनी टेक्स्ट का बारीकी से सत्यापन कर रही हैं। यह प्रक्रिया इसलिए जरूरी है ताकि भविष्य में किसी भी रेगुलेटरी उलझन से बचा जा सके और भारतीय व यूरोपीय कंपनियों के लिए व्यापार के नियम पूरी तरह स्पष्ट रहें।
यह समझौता दुनिया की लगभग एक-चौथाई अर्थव्यवस्था और करीब दो अरब की आबादी को कवर करने वाला एक विशाल मुक्त बाजार तैयार करेगा। इस एग्रीमेंट के लागू होते ही सामान, सेवाओं और डिजिटल व्यापार के नए रास्ते खुलेंगे। सबसे बड़ी बात यह है कि इसके तहत दोनों पक्षों के बीच व्यापार होने वाले 90 प्रतिशत से भी अधिक सामान पर से सीमा शुल्क पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक, दिसंबर 2026 में हस्ताक्षर होने के बाद यह सौदा साल 2027 की पहली छमाही में जमीन पर पूरी तरह लागू हो जाएगा।









