सेंट्रल विस्टा परियोजना में लैंडयूज के बदलाव को चुनौती देने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज..

रिपोर्ट- अवैस उस्मानी

सेंट्रल विस्टा परियोजना सुप्रीम कोर्ट ने चिल्ड्रन पार्क व हरित क्षेत्र का लैंडयूज बदलने के खिलाफ याचिका को खारिज को खारिज किया। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खरिज करते हुए कहा वहां कोई प्राइवेट प्रॉपर्टी नहीं बनाई जा रही है। क्या अब हम आम आदमी से पूछेंगे कि उपराष्ट्रपति का आवास कहाँ होगा?

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस एएम खानविलकर ने कहा कि हर चीज की आलोचना होनी चाहिए लेकिन  वह रचनात्मक हो। जस्टिस एएम खानविलकर ने कहा वहां निजी संपत्ति नहीं बनाई जा रही है, उपराष्ट्रपति का आवास बनाया जा रहा है, चारों ओर हरियाली होना तय है। अधिकारियों द्वारा योजना को पहले ही मंजूरी दे दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या अब हम आम आदमी से पूछेंगे कि उपराष्ट्रपति का आवास कहाँ होगा?

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एएम खानविलकर, दिनेश माहेश्वरी और सीटी रविकुमार की बेंच ने कहा कि जब तक याचिकाकर्ता दुर्भावना का आरोप नहीं लगाता, कोर्ट हस्तक्षेप नहीं कर सकता क्योंकि यह नीतिगत मामला है। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने यह तर्क नहीं दिया कि भूमि उपयोग में परिवर्तन गर्भावनापूर्ण तरीके से किया गया है। याचिकाकर्ता का तर्क गई कि चूंकि पूर्व में यह मनोरंजन क्षेत्र था इस लिए ऐसे ही रखा जाना चहिए था। यह न्यायिक समीक्षा का दायरा नहीं हो सकता। यह सार्वजनिक नीति का मामला है।

दरअसल, याचिका में दावा किया गया था कि सेंट्रल विस्टा के जरिए इस क्षेत्र में आम लोगों की पहुंच कम हो जाएगी। याचिका में आरोप लगाया गया कि भूमि उपयोग में अवैध परिवर्तन की अधिसूचना से दिल्ली के निवासियों को सामाजिक और मनोरंजक गतिविधियों के लिए उपलब्ध सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में अत्यधिक क़ीमती खुले और हरे भरे स्थान से वंचित कर दिया गया है। केंद्र सरकार ने हलफनामा दाखिल कर कहा था कि उक्त प्लॉट नंबर 1 का क्षेत्र वर्तमान में सरकारी कार्यालयों के रूप में उपयोग किया जा रहा है और 90 सालों से यह रक्षा भूमि है। यह कोई मनोरंजक गतिविधि नहीं है। उक्त क्षेत्र में कोई निवासी आबादी या आवासीय कॉलोनी नहीं है।

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