UP: सपा से सहयोगी दल हो रहे नाराज, किसी ने तोड़ा गठबंधन तो कोई दे रहा तोड़ने की धमकी…पढ़े पूरी खबर

उत्तर प्रदेश में विधान परिषद (UP Vidhan Parishad) की 13 सीटों पर 20 जून को चुनाव होना है। इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी की तरफ से विधान परिषद चुनाव के लिए चार उम्मीदवारों ने नामांकन कर दिया है। 2022 के विधानसभा चुनाव में चार सहयोगी दलों के साथ उत्तर प्रदेश का चुनाव समाजवादी पार्टी ने लड़ा था। विधान परिषद के चार एमएलसी सीट समाजवादी पार्टी के कोटे से जीत सकते हैं। जिसमें से एक भी सहयोगी दल को समाजवादी पार्टी ने एमएलसी उम्मीदवार नहीं बनाया। इसके बाद से सहयोगी दल में बगावत शुरू हो गई है।

बता दें, सपा के चार सहयोगी दलों में से केवल राष्ट्रीय लोक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी को राज्यसभा का सदस्य बनवाया। बाकी तीन सहयोगी दलों को कुछ भी हाथ नही लगा। जिसके बाद से सपा के सहयोगी दलों के बीच मतभेद होने लगे है। इस बीच महान दल ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन खत्म करने का ऐलान कर दिया है। महान दल के अध्यक्ष केशव देव मौर्य ने गठबंधन तोड़ने की घोषणा करते हुए समाजवादी पार्टी पर उपेक्षा का आरोप लगाया है।

महान दल के अध्यक्ष केशव देव मौर्य ने नाराजगी जताई है। बता दें, केशव देव मौर्य ने समाजवादी पार्टी पर हमला बोलते हुए कहा, सपा को मेरी जरूरत नहीं, इसलिए अलग हो रहा हूं। उन्होने कहा, ‘दबाव डालने वालों को राज्यसभा, विधान परिषद भेज रहे हैं’। मुझसे तो अखिलेश यादव बात भी नहीं करते है। वही, केशव देव मौर्य ने स्वामी प्रसाद मौर्य को कठपुतली बताया है। उन्होने कहा, एमएलसी की सीट ना मिलने से नाराज हैं।

वही, राज्यसभा चुनाव में सपा ने राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी को राज्यसभा का सदस्य बनवाया। लोकदल के पास 8 विधानसभा सीटें हैं। आठ विधानसभा सीट और समाजवादी पार्टी के सहयोग से राष्ट्रीय लोक दल ने अपना एक राज्य सभा उम्मीदवार उत्तर प्रदेश के कोटे से निर्विरोध बनवाने में सफल रहे। जयंत चौधरी ने अखिलेश यादव और अन्य सभी का इसके लिए धन्यवाद भी दिया था।

बता दें, सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओपी राजभर ने अपने बेटे अरविंद राजभर के लिए एमएलसी की सीट मांग रहे थे। अखिलेश यादव से लगातार वह नाराज भी चल रहे थे। अखिलेश को कई बार अलग-अलग तरीके की सलाह भी दे चुके। फिलहाल चार विधान परिषद सीट पर अखिलेश यादव ने ओपी राजभर के बेटे को टिकट नहीं दिया। जिसके बाद उनके प्रवक्ता ने उनके फैसले पर सवाल उठाए हैं।

वही, जनवादी सोशलिस्ट पार्टी कि राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय चौहान ने भी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, कि अखिलेश यादव ने खुद वादा किया था कि विधान परिषद का सदस्य आपको भेजा जाएगा। आज उन्होंने वादा भी तोड़ दिया। हमारे कार्यकर्ता बहुत ज्यादा नाराज हैं। जल्दी हम बैठक करके फैसला करेंगे।

Related Articles

Back to top button