यूपी- भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा पुल, ताश के पत्ते की तरह फिर ढही करोड़ों की रोड, आवागमन बंद

करोड़ों रुपए की लागत से बना नवनिर्मित राज्य सेतु निगम की अप्रोच रोड गंगा के तेज बहाव में फिर से बह गया है.

भ्रष्टाचार और धांधली में फंसा मेरठ में गंगा नदी का भीकुंड पुल एक बार फिर से चर्चाओं में है. भीकुंड पुल को हस्तिनापुर की ओर से जोड़ने वाली एप्रोच रोड बीती शाम गंगा नदी के तेज बहाव में बह गई जिससे दोनों जिलों के हजारों लोगों की आजीविका और आवागमन प्रभावित है. शासन ने पहले ही गंगापुल में हुए घोटाले पर विजिलेंस जांच बिठाई हुई है. इस जांच के चलते एक साल से नदी के एप्रोच रोड और प्रोटैक्शन वर्क का बजट शासन में फंसा पड़ा है.

24 जून 2023 से मानसून की पहली बारिश ने दस्तक दी. पहाड़ों पर बारिश का पानी कहर बनकर बरसा और फिर गंगानदी में होकर मैदानी इलाकों में पहुंच गया. वेस्ट यूपी के प्राचीन शहर हस्तिनापुर में गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा जिससे गंगा के किनारों पर कटान शुरू हो गया. इसी कटान की जद में गंगा का एप्रोच रोड भी आ गया. पिछले साल पत्थर डालकर बनाया गया एप्रोच रोड कुछ ही घंटों में ढह गया जिससे पुल से सटे हिस्से में कई मीटर का गैप आ गया.

पिछले साल भी गंगानदी पर बने इस पुल का एप्रोच रोड बह गया था. बताया गया कि पुल निर्माण के बाद एप्रोच रोड के प्रोटेक्शन वर्क का पैसा शासन से नही आया. नतीजतन, इस एप्रोच रोड को बिना प्रोटेक्शन वर्क के निर्माण कर आवागमन के लिए शुरू कर दिया गया. पिछले साल पुल ढहने के बाद शासन ने पुल निर्माण को लेकर विजिलेंस की जांच शुरू कराई थी. यह जांच अब भी जारी है.

जानकारी के मुताबिक इस पुल का निर्माण बरसों लटकाकर विभाग और ठेकेदारों ने पुल का बजट बेशुमार बढ़ा दिया था. तमाम कोशिशों के बाद पुल खड़ा हो सका. लेकिन पुल के निर्माण को लेकर हुए भ्रष्टाचार का जिन्न पिछले साल एप्रोच रोड बहने के बाद फाइलों से निकलकर बाहर खड़ा हो गया. सरकार इस पुल में हुए भ्रष्टाचार को लेकर नाराज है और नये निर्माण का बजट मंजूर नही कर रही है. मगर एप्रोच रोड के बिना आवागमन कैसे चलेगा, यह सवाल भी है.

मेरठ के जिलाधिकारी दीपक मीणा ने काफी प्रयासों के बाद पिछले साल इस एप्रोच रोड की मरम्मत कराई और पुलिस को आवागमन के लिए खोल दिया गया. बाकी निर्माण के लिए मेरठ डीएम की ओर से भेजा गया प्रस्ताव शासन में लंबित है. मेरठ प्रशासन की ओर से विभाग को कई रिमाइन्डर भी भेजे जा चुके है लेकिन शासन की ओर से निर्माण के लिए बजट को मंजूरी मिलती दिखाई नही देती.

महाभारतकालीन हस्तिनापुर पौराणिक शहर है और पर्यटन स्थल के रूप में इसे विकसित किया जा रहा है. ऐसे में पुल की एप्रोच रोड टूटने के लिए सैलानियों का आवागमन भी जिले के एक हिस्से से रूक जायेगा. 2022 विधानसभा चुनाव में हस्तिनापुर से बीजेपी के दिनेश खटीक दूसरी बार विधायक चुने गये थे. वह दूसरी मर्तबा यूपी सरकार में मंत्री भी बने है लेकिन उनके प्रयास भी इस पुल को खड़ा करने में नाकाफी साबित हुए है.

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