UP News: दो फॉर्च्यूनर से करोड़ों की बरामदगी, 4 करोड़ से 1.90 करोड़ रुपये कैसे हुई रकम? उठ रहे हैं गंभीर सवाल…

मिर्जापुर में दो फॉर्च्यूनर गाड़ियों से करोड़ों का कैश मिलने के बाद हड़कंप मच गया है। पहले 4 करोड़ और बाद में 1.90 करोड़ रुपये दिखाए जाने पर सवाल उठ रहे हैं।

मिर्जापुर: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के चील्ह थाना क्षेत्र में दो फॉर्च्यूनर गाड़ियों से करोड़ों रुपये की नकदी बरामद होने के बाद सूबे का सियासी और प्रशासनिक पारा गरमा गया है। यह मामला अब सिर्फ नोटों की जब्ती तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसके पीछे एक बड़े सिंडिकेट, टैक्स चोरी, सटीक मुखबिरी और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ा रहस्य इस बात को लेकर है कि शुरुआती दावों में जो रकम 4 करोड़ रुपये बताई जा रही थी, वह आधिकारिक कागजों पर सिमटकर 1.90 करोड़ रुपये कैसे रह गई?

चील्ह चौराहे पर हाई-प्रोफाइल चेकिंग: सामान्य तलाशी या सटीक मुखबिरी?

मिली जानकारी के अनुसार, संदिग्ध गाड़ियां मिर्जापुर की तरफ आ रही थीं। पुलिस ने पहले से मिली इनपुट के आधार पर चील्ह चौराहे पर बैरिकेडिंग कर दोनों फॉर्च्यूनर गाड़ियों को रोका। गाड़ियों की तलाशी लेने पर भारी मात्रा में कैश (नकदी) बरामद हुआ। नोटों की गड्डियां इतनी ज्यादा थीं कि पुलिस को गिनती के लिए तत्काल बैंक से मशीनें मंगवानी पड़ीं और कई घंटों तक कड़े पहरे में काउंटिंग चलती रही।

शुरुआती दौर में पुलिस और प्रशासनिक हलकों से यह खबर बाहर आई कि बरामद रकम लगभग 4 करोड़ रुपये है। लेकिन, कुछ ही घंटों बाद पुलिस के आधिकारिक बयान में इस आंकड़े को बदलकर 1.90 करोड़ रुपये कर दिया गया। बीच की टाइमिंग में करीब 2.10 करोड़ रुपये का यह अंतर क्यों और कैसे आया, इसे लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है और लोग दाल में कुछ काला होने की आशंका जता रहे हैं।

खनन, क्रशर और पेट्रोल पंप सिंडिकेट से जुड़े हैं तार

जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि पकड़ी गई गाड़ियों में से एक गाड़ी ट्रांसपोर्ट तथा गिट्टी-बालू (खनन) कारोबार से जुड़ी एक बड़ी फर्म के नाम पर पंजीकृत है। वहीं दूसरी गाड़ी भी क्रशर प्लांट, पेट्रोल पंप और खनन लॉबी से जुड़े लोगों की बताई जा रही है। इस मामले में दो प्रमुख नाम प्रमुखता से उभरकर सामने आ रहे हैं।

अभिनीत बंसल: इन्हें मिर्जापुर का एक रसूखदार और बड़ा कारोबारी बताया जा रहा है, जिनका ट्रांसपोर्ट, क्रशर प्लांट और पेट्रोल पंप का बड़ा नेटवर्क है।

भारत सिंह: यह शख्स मध्य प्रदेश के सीधी जिले से ताल्लुक रखता है।

अब पुलिस और खुफिया एजेंसियां इस बात की कड़ियां जोड़ रही हैं कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के इन दोनों कारोबारियों के बीच क्या संबंध हैं, और इतनी बड़ी रकम बिना किसी वैध दस्तावेज के कहां ले जाई जा रही थी।

आयकर विभाग की सुस्ती पर सवाल; क्या होगी ED की एंट्री?

करोड़ों की बेहिसाब नकदी मिलने के बाद आयकर विभाग (Income Tax) की टीम को मौके पर बुलाया गया। लेकिन आरोप लग रहे हैं कि इतनी बड़ी बरामदगी के बाद आयकर विभाग ने जिस तरह से केवल ‘नोटिस’ देकर औपचारिकता निभाई, उससे आरोपियों को अपनी फर्मों, बैंक खातों और कंप्यूटर हार्डडिस्क से संभावित सबूतों को मिटाने या हेरफेर करने का पर्याप्त समय मिल गया।

जानकारों का मानना है कि मामला केवल टैक्स चोरी का नहीं है, बल्कि यह नकद लेनदेन सीधे तौर पर अवैध खनन, काले धन और संभावित हवाला नेटवर्क की तरफ इशारा करता है। यही वजह है कि अब मांग उठ रही है कि इस पूरे कैशकांड की जांच प्रवर्तन निदेशालय जैसी बड़ी केंद्रीय एजेंसी को सौंपी जानी चाहिए।

मिर्जापुर कैशकांड के 5 अनुत्तरित सवाल:

१. शुरुआती जांच में दावा की गई 4 करोड़ की रकम अचानक 1.90 करोड़ रुपये में कैसे बदल गई?

२. यह बेहिसाब कैश किसका था और इसे चुनाव या किसी अन्य गुप्त डील के लिए किसे पहुंचाया जा रहा था?

३. क्या यह सिर्फ एक रूटीन चेकिंग थी या किसी व्यावसायिक प्रतिद्वंद्वी ने पुलिस को सटीक मुखबिरी की थी?

४. आयकर विभाग ने नोटिस देने के बजाय संदिग्धों के क्रशर प्लांटों और ठिकानों पर तत्काल छापेमारी क्यों नहीं की?

५. क्या मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के इस सीमावर्ती इलाके में अवैध खनन का कोई बड़ा नकद सिंडिकेट सक्रिय है?

फिलहाल पुलिस ने नकदी और दोनों फॉर्च्यूनर गाड़ियों को जब्त कर लिया है और संबंधित लोगों से पूछताछ की जा रही है, लेकिन जनता के बीच इस ‘कैशकांड’ को दबाने की कोशिशों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं।

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