
हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर में अपनी खूबसूरती और बेहतरीन अदाकारी से पूरी दुनिया का दिल जीतने वाली वेटरन एक्ट्रेस लीला नायडू की जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं थी। जितनी ग्लैमरस और चर्चित उनकी प्रोफेशनल लाइफ रही, उनका निजी जीवन उतना ही ज्यादा दुखों और संघर्षों से भरा रहा। आज ही के दिन 28 जुलाई, 2009 में इस महान अभिनेत्री ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था।
मुंबई में जन्मी लीला नायडू ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जेनेवा और स्विट्जरलैंड में पूरी की थी। साल 1954 में उन्होंने ‘मिस फेमिना’ का खिताब अपने नाम किया था। उनकी खूबसूरती के चर्चे देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी थे। यही वजह थी कि मशहूर इंटरनेशनल मैगजीन ‘वोग’ (Vogue) ने उन्हें दुनिया की सबसे खूबसूरत महिलाओं की सूची में शामिल किया था।
बाउंड स्क्रिप्ट का चलन और शानदार फिल्में
लीला नायडू को भारतीय सिनेमा में ‘बाउंड स्क्रिप्ट’ का चलन शुरू करने के लिए भी जाना जाता है। उस दौर में जब मेकर्स बिना पूरी कहानी के फिल्में शुरू कर देते थे, लीला ने अपनी शर्तें रखीं और पूरी स्क्रिप्ट मिलने के बाद ही काम करने का फैसला किया। इसी उसूल के चलते उन्होंने दिग्गज राज कपूर की फिल्म तक ठुकरा दी थी। उन्होंने साल 1960 में ऋषिकेष मुखर्जी की राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म ‘अनुराधा’ से अपने अभिनय सफर की शुरुआत की थी। इसके बाद ‘ये रास्ते हैं प्यार के’, ‘उम्मीद’, ‘गृहस्वामी’ और ‘त्रिकाल’ जैसी फिल्मों में उन्होंने सुपरस्टार शशि कपूर सहित कई दिग्गज कलाकारों के साथ काम किया।
उतार-चढ़ाव भरा निजी जीवन और दर्दनाक अंत
लीला नायडू की पर्सनल लाइफ काफी उथल-पुथल भरी रही। उनकी पहली शादी ओबेरॉय होटल के मालिक तिलक राज से हुई, जो ज्यादा नहीं चल पाई। इसके बाद उन्होंने लेखक डोम मोरेस से दूसरी शादी की, लेकिन पति से मिले धोखे की वजह से वह रिश्ता भी टूट गया। उम्र के आखिरी पड़ाव में उन्हें भयंकर अकेलेपन, कंगाली और ऑर्थराइटिस जैसी गंभीर बीमारियों ने घेर लिया था। आर्थिक तंगी के कारण उन्हें अपना घर तक किराए पर देना पड़ा था। 28 जुलाई 2009 को 69 वर्ष की आयु में इस लीजेंड्री अभिनेत्री का बेहद गुमनामी और दर्दनाक स्थिति में निधन हो गया।









