
ग्लोबल वॉर्मिंग और जलवायु परिवर्तन के चलते इस समय पूरा पश्चिमी यूरोप भयंकर आग की भट्टी की तरह तप रहा है। पेरिस, रोम, मिलान, मैड्रिड, बार्सिलोना, लंदन, ज्यूरिख और जिनेवा जैसे यूरोप के सबसे बड़े और प्रमुख शहरों में तापमान खतरनाक और ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है। आसमान से बरसती इस आग के कारण कई देशों के प्रशासनिक ढांचे चरमरा गए हैं और नागरिकों के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं। फ्रांस की राजधानी पेरिस में तो पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार दर्ज किया गया है, जिसने पिछले कई रिकॉर्ड्स को ध्वस्त कर दिया है।
कई देशों में स्कूल बंद, इटली में टॉप लेवल हीट अलर्ट
भीषण गर्मी और तपिश को देखते हुए यूरोप के कई देशों में आपातकालीन कदम उठाए जा रहे हैं। बच्चों को इस जानलेवा लू से बचाने के लिए कई जगह स्कूलों के समय में बड़ा बदलाव किया गया है, तो वहीं कई अत्यधिक प्रभावित इलाकों में स्कूलों को पूरी तरह से बंद रखने का आदेश जारी किया गया है। इटली के रोम और फ्लोरेंस जैसे प्रमुख शहरों में प्रशासन ने टॉप-लेवल ‘हीट रेड अलर्ट’ जारी किया है।
मजदूरों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम: इटली सरकार ने इस भीषण गर्मी में खुले में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा के लिए विशेष उपाय और गाइडलाइंस लागू की हैं, ताकि उन्हें हीट स्ट्रोक से बचाया जा सके।
स्पेन में खुले ‘क्लाइमेट शेल्टर’
स्पेन के मैड्रिड और बार्सिलोना जैसे शहरों में हालात और भी गंभीर हैं। यहां सरकार और स्थानीय प्रशासन ने आम जनता को राहत देने के लिए विशेष ‘क्लाइमेट शेल्टर’ (वातानुकूलित आश्रय स्थल) खोले हैं, जहां जाकर लोग चिलचिलाती धूप और गर्मी से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।
यूरोप के सभी प्रभावित देशों का प्रशासन इस समय पूरी तरह मुस्तैद है और लाउडस्पीकरों, सोशल मीडिया व समाचार माध्यमों के जरिए लगातार लोगों से अपील की जा रही है कि वे बहुत जरूरी न होने पर अपने घरों से बाहर न निकलें। इसके साथ ही शरीर में पानी की कमी न होने देने और बुजुर्गों व बच्चों का खास ख्याल रखने की सख्त हिदायत दी जा रही है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले कुछ दिनों तक इस भीषण हीटवेव से राहत मिलने के आसार बेहद कम हैं।









