
पिछले दशक में भारत की विकास यात्रा में अभूतपूर्व बदलाव आया है। विभिन्न क्षेत्रों में भारत ने खुद को एक ऐसा देश बना लिया है जो पहले आयात पर निर्भर था, अब वैश्विक निर्यातक बन चुका है। यह असाधारण परिवर्तन मोदी सरकार की नीतियों और पहलों का सीधा परिणाम है।
‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों की वैश्विक सफलता
आज भारतीय उत्पाद दुनिया भर में पहचाने जाते हैं और घरेलू बाजारों में भी विदेशों द्वारा प्रमुखता से उपलब्ध उत्पाद अब ‘मेड इन इंडिया’ के रूप में सामने आ रहे हैं। फ्रेंच फ्राइज से लेकर कॉफी, स्मार्टफोन से लेकर इलेक्ट्रिक कारों तक, भारतीय उत्पाद अब वैश्विक मंच पर बेंचमार्क सेट कर रहे हैं। मोदी सरकार के निरंतर प्रयासों और अद्वितीय दृष्टिकोण के चलते भारत ने खुद को विदेशी उत्पादों का उपभोक्ता से एक प्रमुख निर्माता और आपूर्तिकर्ता बना लिया है।
कॉफी और फ्रेंच फ्राइज का निर्यात: एक क्रांतिकारी बदलाव
वैश्वीकरण के साथ भारत में विदेशी खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ी थी, जिसके कारण 2000 के मध्य तक भारत का फ्रेंच फ्राइज आयात 5,000 टन से अधिक हो गया था, जो 2010-11 में 7,863 टन तक पहुंच गया था। हालांकि, 2023-24 में भारत ने 135,877 टन फ्रेंच फ्राइज का निर्यात ₹1,478.73 करोड़ की कीमत पर किया, और यह दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य पूर्व, जापान और ताइवान जैसे बाजारों तक पहुंचा।
इसने भारत को फ्रेंच फ्राइज का प्रमुख निर्यातक बना दिया, जबकि पहले यह उत्पाद आयात किया जाता था। इसी तरह, भारत की कॉफी उद्योग में भी असाधारण वृद्धि देखी गई है। 2023-24 के वित्तीय वर्ष में कॉफी निर्यात $1.29 बिलियन तक पहुंच गया, जो 2020-21 के $719.42 मिलियन से दोगुना हो गया। इससे भारत को दुनिया का सातवां सबसे बड़ा कॉफी उत्पादक देश बना दिया है।
‘मेड इन इंडिया’ टेक्नोलॉजी का वैश्विक प्रभाव
भारत में अब एप्पल जैसे वैश्विक ब्रांड के उत्पाद भी स्थानीय स्तर पर बन रहे हैं। 2024 में एप्पल ने भारत से ₹1 लाख करोड़ से अधिक के आईफोन का निर्यात किया, जो एक अभूतपूर्व आंकड़ा है। मोदी सरकार की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना की वजह से आईफोन निर्यात में 42 प्रतिशत की वृद्धि हुई और घरेलू उत्पादन में भी 46 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई।
भारत में अब ‘मेड इन इंडिया’ आईफोन दुनिया भर में निर्यात हो रहे हैं, जो भारत की वैश्विक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) में भारत की बढ़ती भूमिका
भारत अब इलेक्ट्रिक कारों के क्षेत्र में भी वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है। फ्रेंच मल्टीनेशनल कंपनी सिट्रोएन ने अपनी ‘मेड इन इंडिया’ इलेक्ट्रिक कार, Citroën ë-C3 का निर्यात अंतरराष्ट्रीय बाजारों में करना शुरू कर दिया है। 2024 के अप्रैल में इस EV को इंडोनेशिया भेजा गया। यह कदम इस बात का प्रमाण है कि भारत अब न केवल एक रणनीतिक बाजार है, बल्कि एक प्रमुख वाहन और मोबिलिटी टेक्नोलॉजी का स्रोत भी बन चुका है।
भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग की वैश्विक सफलता
भारत की ऑटोमोबाइल उद्योग ने भी महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है, जैसे कि मारुति सुजुकी के फ्रॉन्क्स एसयूवी का जापानी बाजार में हिट होना। यह मारुति सुजुकी इंडिया द्वारा जापान में लॉन्च किया गया पहला एसयूवी था, जिसकी 1,600 से अधिक यूनिट्स अगस्त 2024 में जापान भेजी गईं। यह भारत के लिए एक मील का पत्थर है और वैश्विक निर्यात में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है।
मारुति सुजुकी का यह एसयूवी अब 70 देशों में निर्यात किया जा रहा है, जो भारत में बने उत्पादों की वैश्विक सफलता को दर्शाता है।
निष्कर्ष
भारत अब केवल एक उपभोक्ता राष्ट्र नहीं, बल्कि एक वैश्विक निर्माता और निर्यातक शक्ति बन चुका है। मोदी सरकार की नीतियों ने भारतीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धी बनाया है और भारत की अर्थव्यवस्था को वैश्विक मंच पर एक नई दिशा दी है।









