डायमंड सिटी सूरत का विकास मॉडल, कैसे बना ग्लोबल इंडस्ट्रियल पावरहाउस?

सूरत अब एक बार फिर चर्चा में है, क्योंकि यहां जल्द ही वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस (VGRC) आयोजित होने जा रहा है। यह आयोजन शहर की तेज़ रफ्तार विकास यात्रा और वैश्विक निवेश को आकर्षित करने की क्षमता को दर्शाता है।

गुजरात का दूसरा सबसे बड़ा और देश का नौवां सबसे बड़ा शहर सूरत आज एक ग्लोबल इंडस्ट्रियल पावरहाउस के रूप में उभर चुका है। तापी नदी के किनारे बसा यह शहर अपनी मजबूत औद्योगिक पहचान के चलते ‘डायमंड सिटी’ और ‘सिल्क सिटी’ के नाम से जाना जाता है।

बता दें, सूरत अब एक बार फिर चर्चा में है, क्योंकि यहां जल्द ही वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस (VGRC) आयोजित होने जा रहा है। यह आयोजन शहर की तेज़ रफ्तार विकास यात्रा और वैश्विक निवेश को आकर्षित करने की क्षमता को दर्शाता है।

वहीं, इतिहास की बात करें तो सूरत 16वीं सदी में भारत और पश्चिमी देशों के बीच एक अहम व्यापारिक केंद्र था। इसकी रणनीतिक स्थिति के कारण ब्रिटिश, पुर्तगाली, फ्रेंच और डच जैसे देशों के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत हुए। यही वजह है कि सूरत उस दौर में एक प्रमुख शिपबिल्डिंग और व्यापारिक हब बनकर उभरा।

आज सूरत दुनिया के करीब 90 प्रतिशत प्राकृतिक हीरों और लगभग 25 प्रतिशत लैब-ग्रो डायमंड की प्रोसेसिंग करता है। शहर में लगभग 6,000 डायमंड कटिंग और पॉलिशिंग यूनिट्स हैं, जिनमें से अधिकांश MSME सेक्टर से जुड़ी हैं। इसके अलावा सूरत एशिया के सबसे बड़े टेक्सटाइल हब में भी शामिल है।

मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, कुशल श्रमिकों की उपलब्धता और बिजनेस फ्रेंडली माहौल ने सूरत को आर्थिक रूप से बेहद मजबूत बनाया है। आधुनिक शहरी योजना, बेहतर कनेक्टिविटी और सस्टेनेबल विकास के प्रयासों ने इसे देश के सबसे तेजी से बढ़ते शहरों में शामिल कर दिया है।

नीति आयोग के ‘ग्रोथ हब’ इनिशिएटिव के तहत सूरत को एक मॉडल क्षेत्र के रूप में चुना गया है, जहां समेकित क्षेत्रीय विकास की नई रणनीति लागू की जा रही है। इसके तहत सूरत इकोनॉमिक रीजन (SER) मास्टर प्लान 2047 तक साउथ गुजरात के कई जिलों—सूरत, भरूच, नवसारी, तापी, डांग और वलसाड—को एक वैश्विक आर्थिक केंद्र बनाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है।

सूरत की यह विकास यात्रा न सिर्फ गुजरात बल्कि पूरे भारत के लिए आर्थिक प्रगति का एक मजबूत उदाहरण बन चुकी है।

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